2G इथेनॉल निर्यात को मंजूरी: भारत की हरित ऊर्जा में नया कदम

2G इथेनॉल क्या है और कैसे बनाया जाता है?

2G इथेनॉल, या सेकंड जेनरेशन इथेनॉल, एक उन्नत बायोफ्यूल है जो गैर-खाद्य सामग्रियों से उत्पादित किया जाता है। यह पारंपरिक इथेनॉल से अलग है, जो मुख्य रूप से गन्ने या अनाज से बनता है। इसके बजाय, 2G इथेनॉल को लिग्नोसेल्युलोजिक फीडस्टॉक से तैयार किया जाता है।

इस प्रक्रिया में कृषि अवशेष जैसे चावल और गेहूं का भूसा, मक्का का चारा, गन्ना खोई, लकड़ी का कचरा और वुडी बायोमास का उपयोग होता है। इसके अलावा, गैर-खाद्य फसलें जैसे घास और शैवाल भी फीडस्टॉक के रूप में काम आती हैं। उत्पादन प्रक्रिया में एंजाइमेटिक हाइड्रोलिसिस और फर्मेंटेशन जैसी तकनीकों का सहारा लिया जाता है।

यह ईंधन न केवल पेट्रोल में ब्लेंडिंग के लिए उपयुक्त है, बल्कि गैर-ईंधन उपयोग जैसे रसायन उद्योग में भी प्रयुक्त होता है। 2025 तक, भारत में 2G इथेनॉल उत्पादन क्षमता 1,000 KLPD (किलो लिटर प्रति दिन) से अधिक हो चुकी है।

भारत में 2G इथेनॉल की पृष्ठभूमि

भारत ने बायोफ्यूल नीति को मजबूत करने के लिए कई कदम उठाए हैं। 2018 की राष्ट्रीय बायोफ्यूल नीति के तहत 2G इथेनॉल को प्रोत्साहित किया गया। इसका उद्देश्य कृषि कचरे का उपयोग बढ़ाना और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

2025 तक, देश ने 12 2G बायोरिफाइनरी प्लांट स्थापित करने का लक्ष्य रखा था, जिनमें से अधिकांश चालू हो चुके हैं। उदाहरणस्वरूप, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL) का पनिपत प्लांट 100 KLPD क्षमता वाला है। इसी तरह, हिंदुस्तान पेट्रोलियम का बठिंडा प्लांट 2025 में चालू हुआ।

इन प्लांटों में कुल निवेश 14,000 करोड़ रुपये से अधिक का है। सरकार ने प्रधानमंत्री जी-वन योजना के तहत 1,969.50 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान की। इससे 2G इथेनॉल उत्पादन में तेजी आई।

24 सितंबर 2025 का DGFT नोटिफिकेशन: विस्तार से समझें

24 सितंबर 2025 को DGFT ने नोटिफिकेशन नंबर 32/2025-26 जारी किया। इसने HS कोड 22072000 के तहत 2G इथेनॉल के निर्यात पर लगी पाबंदी हटा दी। निर्यात ईंधन और गैर-ईंधन उद्देश्यों के लिए अनुमत है।

निर्यातकों को वैध निर्यात प्राधिकरण और फीडस्टॉक सर्टिफिकेट की आवश्यकता होगी। सर्टिफिकेट राज्य आबकारी विभाग या NABCB मान्यता प्राप्त थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन एजेंसी से जारी होगा। इथेनॉल को IS 15464 मानकों का पालन करना होगा।

यह नोटिफिकेशन तत्काल प्रभाव से लागू है। इससे पहले, निर्यात प्रतिबंधित था ताकि घरेलू ब्लेंडिंग लक्ष्य प्रभावित न हो। अब, 20% ब्लेंडिंग लक्ष्य हासिल होने के बाद, निर्यात खुला है।

निर्यात मंजूरी से किसे मिलेगा लाभ?

बायोफ्यूल उत्पादक कंपनियों को फायदा

2G इथेनॉल उत्पादक कंपनियां मुख्य लाभार्थी होंगी। वर्तमान में, भारत की इथेनॉल उत्पादन क्षमता 1,016 करोड़ लीटर है, जिसमें 2G का योगदान 10% से अधिक है। निर्यात से अतिरिक्त आय बढ़ेगी।

उद्योग अनुमान के अनुसार, 2025-26 में निर्यात से 5 अरब डॉलर का राजस्व संभव है। कंपनियां जैसे प्राज इंडस्ट्रीज और IOCL वैश्विक बाजारों में प्रवेश करेंगी। इससे उत्पादन क्षमता विस्तार होगा।

किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा

किसान कृषि अवशेष बेचकर अतिरिक्त आय कमा सकेंगे। 2025 तक, इथेनॉल खरीद से किसानों को 1.18 लाख करोड़ रुपये मिल चुके हैं। 2G इथेनॉल से फसल अवशेष जलाने की समस्या कम होगी।

पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में पराली जलाने से प्रदूषण कम होगा। किसानों को प्रति टन अवशेष 2,000-3,000 रुपये मिल सकते हैं। इससे 15,000 नौकरियां सृजित होंगी।

  • आय वृद्धि: अवशेष बिक्री से वार्षिक 5 अरब डॉलर अतिरिक्त।

  • रोजगार: ग्रामीण क्षेत्रों में 7,400 उच्च-मूल्य नौकरियां।

  • पर्यावरण लाभ: 698 लाख टन CO2 उत्सर्जन में कमी।

अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा पर प्रभाव

निर्यात से विदेशी मुद्रा बचत बढ़ेगी। 2025 तक, इथेनॉल ब्लेंडिंग से 1.36 लाख करोड़ रुपये की बचत हुई। कच्चे तेल आयात 19.3 मिलियन मीट्रिक टन कम हुआ।

वैश्विक मांग बढ़ रही है, खासकर यूरोप और अमेरिका में। भारत 2G इथेनॉल से हरित ऊर्जा निर्यातक बनेगा। इससे व्यापार घाटा कम होगा।

इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम की प्रगति

भारत ने 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग लक्ष्य 2030 से पहले, 2025 में हासिल कर लिया। 2014 में यह मात्र 1.5% था, जो अब 20% हो गया। ईंधन आपूर्ति वर्ष (ESY) 2025-26 के लिए 1,050 करोड़ लीटर डिनेचर्ड एन्हाइड्रस इथेनॉल की बोली आमंत्रित की गई।

सरकार ने FCI के 52 लाख मीट्रिक टन अधिशेष चावल को इथेनॉल उत्पादन के लिए अनुमति दी। इसी तरह, 40 लाख मीट्रिक टन चीनी का डायवर्जन स्वीकृत हुआ। इससे पेट्रोल आयात पर निर्भरता घटी।

ब्लेंडिंग से ईंधन खर्च में कमी आई। उपभोक्ताओं को साफ-सुथरा ईंधन मिला, जो CO, हाइड्रोकार्बन और पार्टिकुलेट मैटर उत्सर्जन कम करता है।

प्रल्हाद जोशी की अपील: उत्पादन बढ़ाएं, निर्यात करें

केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने सितंबर 2025 में इंडिया शुगर एंड बायो-एनर्जी कॉन्फ्रेंस में बायोफ्यूल उत्पादकों से उत्पादन बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि वैश्विक इथेनॉल मांग का लाभ उठाएं।

जोशी ने भारत की सफलता का उल्लेख किया: 20% ब्लेंडिंग लक्ष्य समय से पहले हासिल। इससे 1.44 लाख करोड़ रुपये विदेशी मुद्रा बचत हुई। उन्होंने निर्यात को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

मंत्री ने सुझाव दिया कि चीनी मिलें बायोफ्यूल निर्यात पर फोकस करें। इससे किसानों और मिलों की आय दोगुनी हो सकती है।

पर्यावरणीय लाभ और चुनौतियां

2G इथेनॉल कम कार्बन उत्सर्जन वाला है। इसमें GHG में 70-80% कमी होती है। पराली जलाने से बचाव दिल्ली-एनसीआर प्रदूषण कम करेगा।

हालांकि, चुनौतियां हैं। एंजाइम आयात पर निर्भरता है, जो उत्पादन लागत बढ़ाती है। सरकार बायोई 3 नीति के तहत एंजाइम विनिर्माण सुविधाएं स्थापित कर रही है।

फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की कमी एक बाधा है। 2025 से E20 अनुकूल वाहन अनिवार्य हैं, लेकिन पुराने वाहनों के लिए किट विकसित हो रही हैं।

भविष्य की संभावनाएं

2025-26 में 2G इथेनॉल उत्पादन 2 मिलियन टन तक पहुंच सकता है। सरकार 100% इथेनॉल वाहनों (E100) के लिए मानक जारी कर रही है।

निर्यात से भारत हरित ऊर्जा हब बनेगा। वैश्विक सहयोग बढ़ेगा, जैसे लैंजाटेक के साथ 3G इथेनॉल प्रोजेक्ट। इससे ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।

कुल मिलाकर, यह नीति सतत विकास की दिशा में महत्वपूर्ण है।