मनरेगा और जल संरक्षण: एक नई शुरुआत
केंद्र सरकार ने जल संरक्षण को rural development की रीढ़ मानते हुए महात्मा गांधी नरेगा अधिनियम, 2005 में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। 23 सितंबर 2025 को जारी अधिसूचना के अनुसार, MNREGA funds का एक निश्चित हिस्सा water conservation activities पर अनिवार्य रूप से खर्च होगा। यह बदलाव groundwater depletion की समस्या से निपटने के लिए आवश्यक है, जहां भारत में 11.13% blocks over-exploited और 3.05% critical श्रेणी में आते हैं, जैसा कि Central Ground Water Board (CGWB) की 2024 रिपोर्ट में उल्लेखित है।
इस initiative से rural employment के साथ-साथ sustainable water management को बढ़ावा मिलेगा। Union Rural Development Ministry और Ministry of Jal Shakti के संयुक्त प्रयास से यह योजना देशभर के water-stressed areas को target करेगी।
जल सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता: क्यों जरूरी?
भारत में groundwater crisis तेजी से बढ़ रही है। NITI Aayog की रिपोर्ट के अनुसार, 600 मिलियन से अधिक लोग high to extreme water stress का सामना कर रहे हैं, और 2030 तक water demand दोगुनी हो सकती है। 2024-25 में MNREGA का बजट 88,000 करोड़ रुपये है, जिसमें से एक बड़ा हिस्सा अब rainwater harvesting और water storage पर जाएगा।
इस संदर्भ में, 25 सितंबर 2025 को Krishi Bhawan, New Delhi में ‘National Initiative on Water Security’ का शुभारंभ हुआ। Agriculture Minister Shivraj Singh Chouhan ने कहा कि PM Narendra Modi के नेतृत्व में यह decision water security को मजबूत करेगा। उन्होंने जोर दिया कि जल संरक्षण बिना rural economy की प्रगति संभव नहीं।
इसके अलावा, climate change के कारण summer monsoon में 8% कमी आई है, जिससे north India में groundwater depletion rate 1.5 cm/year तक पहुंच गया है। 2002-2021 के बीच 450 km³ groundwater loss हुआ, जैसा कि hydrological models से पता चलता है।
बजट आवंटन: 65% कैसे और कहां खर्च होगा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जल संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण अभियान शुरू किए हैं। इनमें शामिल हैं:
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कैच द रेन : यह अभियान वर्षा जल संचयन को प्रोत्साहित करता है, ताकि बारिश के पानी का अधिकतम उपयोग हो सके।
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अमृत सरोवर योजना : इस योजना के तहत देशभर में 50,000 सरोवर बनाने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन 26 सितंबर 2025 तक 68,000 सरोवर बनाए जा चुके हैं।
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रेन वॉटर हार्वेस्टिंग : ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने के लिए कई परियोजनाएं चल रही हैं।
इन अभियानों ने जल संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने और भूजल स्तर को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
मनरेगा और जल संरक्षण का महत्व
महात्मा गांधी नरेगा योजना, जो 2005 में शुरू की गई थी, ग्रामीण भारत में रोजगार सृजन के साथ-साथ बुनियादी ढांचे के विकास के लिए एक महत्वपूर्ण योजना है। इस योजना के तहत अब तक कई तालाब, कुएं, चेक डैम और नहरें बनाई गई हैं। जल संरक्षण पर 65% बजट केंद्रित करने का निर्णय इस योजना को और प्रभावी बनाएगा।
कृषि मंत्री ने बताया कि यह निर्णय न केवल जल संकट को कम करने में मदद करेगा, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत करेगा। जल संरक्षण कार्यों से किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध होगा, जिससे कृषि उत्पादकता में वृद्धि होगी। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
जल संकट की गंभीरता
भारत में जल संकट एक गंभीर समस्या है। नीति आयोग की 2018 की रिपोर्ट के अनुसार, देश के 600 मिलियन लोग जल संकट का सामना कर रहे हैं। इसके अलावा, 21 प्रमुख शहरों में 2025 तक भूजल स्तर के पूरी तरह समाप्त होने का खतरा है। जलवायु परिवर्तन के कारण अनियमित वर्षा और सूखे की स्थिति ने इस समस्या को और गंभीर बना दिया है।
मनरेगा के तहत जल संरक्षण पर केंद्रित यह पहल इन चुनौतियों से निपटने में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। तालाबों, कुओं और चेक डैम के निर्माण से न केवल जल संचयन होगा, बल्कि मिट्टी का कटाव भी रोका जा सकेगा।
भविष्य के लिए जल संरक्षण की रणनीति
केंद्र सरकार ने जल संरक्षण को भविष्य की प्राथमिकता बनाया है। इसके लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा रहे हैं:
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चेक डैम और तालाबों का निर्माण : ग्रामीण क्षेत्रों में जल संचयन के लिए अधिक चेक डैम और तालाब बनाए जाएंगे।
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जल संचयन संरचनाओं का रखरखाव : पुराने कुओं और तालाबों की मरम्मत और गाद हटाने का कार्य किया जाएगा।
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जागरूकता अभियान : ग्रामीण समुदायों को जल संरक्षण के महत्व के बारे में शिक्षित किया जाएगा।
इन प्रयासों से न केवल जल संकट कम होगा, बल्कि ग्रामीण भारत में पानी की उपलब्धता बढ़ेगी और पर्यावरण संतुलन को बनाए रखने में मदद मिलेगी।
मनरेगा के तहत 65% बजट को जल संरक्षण पर केंद्रित करने का निर्णय ग्रामीण भारत के लिए एक क्रांतिकारी कदम है। यह पहल न केवल जल संकट से जूझ रहे क्षेत्रों में राहत प्रदान करेगी, बल्कि भूजल स्तर को बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी मदद करेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू किए गए इस अभियान से देश में जल सुरक्षा को सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है।
