ट्रैक्टर मोडिफिकेशन का बढ़ता ट्रेंड
हाल के वर्षों में, खासकर युवा किसानों के बीच ट्रैक्टर मोडिफिकेशन का चलन तेजी से बढ़ा है। ट्रैक्टर को आकर्षक बनाने और सोशल मीडिया पर रील्स के लिए लोग लाखों रुपये खर्च कर रहे हैं। इसमें सबसे लोकप्रिय है ओवरसाइज टायर लगवाना, जो ट्रैक्टर के लुक्स को बढ़ाता है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह ट्रेंड न केवल ट्रैक्टर की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है, बल्कि कई गंभीर नुकसान भी पहुंचाता है। आइए, इन नुकसानों को विस्तार से समझते हैं।
माइलेज पर पड़ता है बुरा असर
ओवरसाइज टायर लगाने का सबसे बड़ा नुकसान ट्रैक्टर के माइलेज पर पड़ता है। ये टायर स्टैंडर्ड टायरों की तुलना में भारी और चौड़े होते हैं, जिसके कारण सड़क या खेत में घर्षण बढ़ जाता है। इससे ईंधन की खपत में 15-20% तक की वृद्धि हो सकती है। साथ ही, बड़े टायरों को घुमाने के लिए इंजन को अतिरिक्त शक्ति की आवश्यकता होती है, जिससे इंजन का RPM (रिवॉल्यूशन प्रति मिनट) कम हो जाता है। परिणामस्वरूप, ट्रैक्टर अधिक डीजल खपत करता है, जिससे किसानों का खर्च बढ़ जाता है।
इंजन पर अतिरिक्त दबाव
बड़े टायरों को चलाने के लिए इंजन पर अतिरिक्त लोड पड़ता है, खासकर कम हॉर्सपावर (HP) वाले ट्रैक्टरों में। उदाहरण के लिए, यदि आप 35-40 एचपी वाले ट्रैक्टर में ओवरसाइज टायर लगाते हैं, तो इंजन की परफॉर्मेंस में स्पष्ट कमी देखी जा सकती है। इससे इंजन की उम्र कम हो सकती है और बार-बार मरम्मत की जरूरत पड़ सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, स्टैंडर्ड टायर ही इंजन की क्षमता के अनुसार डिज़ाइन किए जाते हैं, और ओवरसाइज टायर लगाने से इंजन की कार्यक्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
गियरबॉक्स और पावर अनुपात में गड़बड़ी
ट्रैक्टर के गियरबॉक्स और पावर अनुपात को स्टैंडर्ड टायरों के हिसाब से डिज़ाइन किया जाता है। ओवरसाइज टायर लगाने से यह अनुपात बिगड़ जाता है, जिसके कारण ट्रैक्टर की गति और खींचने की शक्ति में असंतुलन पैदा हो सकता है। उदाहरण के लिए, बड़े टायरों के साथ ट्रैक्टर की गति तो बढ़ सकती है, लेकिन भारी उपकरण खींचने की उसकी क्षमता कम हो सकती है। इससे गियरबॉक्स पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है, जिससे गियर शिफ्टिंग में समस्या या गियरबॉक्स की जल्दी खराबी हो सकती है।
बैलेंसिंग और स्टीयरिंग कंट्रोल में कमी
ट्रैक्टर की बॉडी और स्टीयरिंग सिस्टम को स्टैंडर्ड टायरों के लिए डिज़ाइन किया जाता है। ओवरसाइज टायर लगाने से ट्रैक्टर की बैलेंसिंग बिगड़ सकती है, खासकर अगर फ्रंट वेट का उपयोग न किया जाए। भारी लोड उठाने या खींचने के दौरान ट्रैक्टर का अगला हिस्सा बार-बार उठ सकता है, जो खतरनाक हो सकता है। इसके अलावा, बड़े टायरों के कारण स्टीयरिंग कंट्रोल भी कम हो जाता है। खेतों में जहां सटीक स्टीयरिंग की जरूरत होती है, वहां ओवरसाइज टायर नियंत्रण को और मुश्किल बना सकते हैं।
वारंटी और इंश्योरेंस पर प्रभाव
नए ट्रैक्टरों में ओवरसाइज टायर लगाने से कंपनी की वारंटी प्रभावित हो सकती है। ट्रैक्टर निर्माता स्पष्ट रूप से कहते हैं कि अनधिकृत मोडिफिकेशन वारंटी को रद्द कर सकता है। उदाहरण के लिए, यदि इंजन, गियरबॉक्स या एक्सल में कोई खराबी आती है और कंपनी को पता चलता है कि ओवरसाइज टायर इसका कारण हैं, तो वे वारंटी क्लेम को खारिज कर सकते हैं। इसके अलावा, इंश्योरेंस कंपनियां भी ओवरसाइज टायरों के कारण क्लेम को अस्वीकार कर सकती हैं, क्योंकि यह ट्रैक्टर के मूल डिज़ाइन में बदलाव माना जाता है।
रखरखाव का बढ़ता खर्च
ओवरसाइज टायरों का उपयोग करने से ट्रैक्टर के क्लच, गियरबॉक्स, एक्सल और डिफरेंशियल पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इससे इन हिस्सों में जल्दी खराबी आ सकती है, जिसके परिणामस्वरूप रखरखाव का खर्च बढ़ जाता है। उदाहरण के लिए, एक स्टैंडर्ड टायर की तुलना में ओवरसाइज टायर की लागत भी अधिक होती है, और इन्हें बार-बार बदलने की जरूरत पड़ सकती है। किसानों के लिए यह आर्थिक रूप से नुकसानदायक साबित हो सकता है।
स्टैंडर्ड टायर क्यों हैं बेहतर?
ट्रैक्टर निर्माता स्टैंडर्ड टायरों को ट्रैक्टर की कार्यक्षमता, माइलेज, और बैलेंसिंग को ध्यान में रखकर डिज़ाइन करते हैं। ये टायर खेतों में काम करने, भारी उपकरण खींचने, और विभिन्न प्रकार की सतहों पर चलने के लिए उपयुक्त होते हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि ट्रैक्टर के लुक्स के लिए ओवरसाइज टायर लगाने के बजाय, स्टैंडर्ड टायरों का उपयोग करें और ट्रैक्टर की नियमित सर्विसिंग करवाएं। इससे न केवल ट्रैक्टर की उम्र बढ़ेगी, बल्कि ईंधन और रखरखाव का खर्च भी कम होगा।