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ट्रैक्टर की डीजल खपत बढ़ रही है? अपनाएँ ये 6 आसान टिप्स और बढ़ाएँ माइलेज!

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ट्रैक्टर का माइलेज बढ़ाने की जरूरत क्यों है?

आज के दौर में डीजल की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, जो किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है। एक औसत ट्रैक्टर प्रति घंटे 3 से 5 लीटर डीजल खपत करता है, और अगर माइलेज कम हो तो खेती का खर्च आसमान छूने लगता है। 2025 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में डीजल की कीमत औसतन 90 रुपये प्रति लीटर के आसपास है, जिससे हर लीटर की बचत सीधे किसान की जेब में जाती है।

इसके अलावा, कम माइलेज से ट्रैक्टर का इंजन भी जल्दी खराब होता है, जिससे मरम्मत का खर्च बढ़ता है। इसलिए, डीजल बचत और माइलेज बढ़ाना न केवल आर्थिक लाभ देता है, बल्कि ट्रैक्टर की लंबी उम्र भी सुनिश्चित करता है।

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ट्रैक्टर सर्विसिंग: नियमित चेकअप से डीजल बचाएं

ट्रैक्टर की तरह कार या बाइक की भी नियमित सर्विसिंग जरूरी होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, हर 250 घंटे की उपयोग के बाद इंजन ऑयल, एयर फिल्टर और डीजल फिल्टर बदलना चाहिए। यह प्रक्रिया इंजन को साफ रखती है और अतिरिक्त घर्षण से बचाती है, जिससे डीजल की खपत 10-15% तक कम हो सकती है।

कृषि मंत्रालय की ओर से जारी गाइडलाइंस में भी सुझाया गया है कि समय पर रखरखाव से न केवल ईंधन बचता है, बल्कि ट्रैक्टर की कार्यक्षमता भी बढ़ती है। इसलिए, स्थानीय मैकेनिक से संपर्क कर नियमित जांच सुनिश्चित करें।


सही टायर प्रेशर: इंजन पर दबाव कम करें

कई किसान ट्रैक्टर के टायर प्रेशर को नजरअंदाज कर देते हैं, जो एक बड़ी गलती है। कम हवा से टायरों पर ज्यादा दबाव पड़ता है, जबकि ज्यादा हवा से इंजन असंतुलित हो सकता है। कंपनी द्वारा सुझाए गए प्रेशर के अनुसार हवा भरने से डीजल की खपत में 5-10% की कमी आ सकती है। उदाहरण के लिए, एक 50 हॉर्सपावर ट्रैक्टर के लिए फ्रंट टायर में 18-20 PSI और रियर टायर में 22-24 PSI प्रेशर सही माना जाता है। हर बार खेत पर काम शुरू करने से पहले टायर चेक करना इस दिशा में पहला कदम हो सकता है।


सही गियर का उपयोग: डीजल और परफॉर्मेंस में सुधार

गलत गियर पर ट्रैक्टर चलाने से इंजन पर अनचाहा बोझ पड़ता है, जिससे डीजल तेजी से खर्च होता है। भारी काम जैसे जुताई या हल चलाने के लिए कम आरपीएम और ज्यादा टॉर्क देने वाले गियर का इस्तेमाल करें। उदाहरण के तौर पर, 2 या 3 नंबर गियर में ट्रैक्टर को धीरे-धीरे चलाने से ईंधन की बचत होती है और इंजन की आयु भी बढ़ती है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि सही गियर चयन से माइलेज 20% तक बढ़ सकता है, बशर्ते ट्रैक्टर ऑपरेटर को इसके बारे में प्रशिक्षण हो।


इंजन बंद करने की आदत: छोटी सावधानी, बड़ा फायदा

खेत में काम के दौरान थोड़ी देर रुकने पर इंजन चालू छोड़ना आम बात है, लेकिन इससे डीजल की बर्बादी होती है। अगर ट्रैक्टर 5-10 मिनट से ज्यादा खड़ा है, तो इंजन बंद कर देना चाहिए। एक अध्ययन के अनुसार, इंजन को खाली चलाने से प्रति घंटे 0.5 लीटर डीजल बर्बाद होता है। यह आदत अपनाने से सालाना सैकड़ों रुपये की बचत हो सकती है, खासकर उन किसानों के लिए जो दिनभर खेत में काम करते हैं।

सही औजार चुनें: ट्रैक्टर की क्षमता का ध्यान रखें

ट्रैक्टर की हॉर्सपावर से ज्यादा भारी औजार जोड़ने से इंजन पर दबाव पड़ता है, जिससे डीजल खपत बढ़ती है। उदाहरण के लिए, एक 35 हॉर्सपावर ट्रैक्टर के साथ 50 हॉर्सपावर के हल का इस्तेमाल करना नुकसानदायक हो सकता है। हमेशा ट्रैक्टर की क्षमता के अनुसार हल, कल्टीवेटर या अन्य उपकरण चुनें। इससे न केवल डीजल बचता है, बल्कि इंजन की मरम्मत का खर्च भी कम होता है।

खेत में योजना बनाएं: अनावश्यक चक्कर से बचें

बिना योजना के ट्रैक्टर चलाने से खेत में अनावश्यक चक्कर लगते हैं, जो डीजल और समय दोनों की बर्बादी का कारण बनते हैं। काम शुरू करने से पहले खेत का पैटर्न तय करें और सीधी रेखाओं में ट्रैक्टर चलाएं। इससे न केवल ईंधन बचता है, बल्कि काम की गति भी बढ़ती है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि योजना के साथ काम करने से डीजल की खपत 15% तक कम हो सकती है।

ट्रैक्टर को बनाएं ईंधन-कुशल

डीजल की बढ़ती कीमतों और खेती के बढ़ते खर्च को देखते हुए, ट्रैक्टर का माइलेज बढ़ाना आज की जरूरत है। इन 6 आसान टिप्स नियमित सर्विसिंग, सही टायर प्रेशर, गियर उपयोग, इंजन बंद करने की आदत, सही औजार और खेत में योजना को अपनाकर किसान न केवल डीजल बचत कर सकते हैं, बल्कि अपने ट्रैक्टर की उम्र भी लंबी कर सकते हैं। कृषि विभाग के अनुसार, इन सावधानियों से औसतन 30% तक ईंधन की बचत संभव है।

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