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Tractor Scheme: महिलाओं को ट्रैक्टर पर 50% सब्सिडी से खेती में नई ताकत

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ट्रैक्टर योजना का परिचय और महत्व

कृषि क्षेत्र में यंत्रीकरण की आवश्यकता बढ़ रही है, क्योंकि भारत की 58% आबादी कृषि पर निर्भर है। केंद्र सरकार ने 2014-15 में सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन (SMAM) योजना शुरू की। यह योजना छोटे और सीमांत किसानों को आधुनिक मशीनें सस्ते दामों पर उपलब्ध कराती है।

विशेष रूप से महिलाओं के लिए यह योजना लाभकारी है। 2025 के बजट में योजना के लिए 1,000 करोड़ रुपये से अधिक का प्रावधान किया गया है। केंद्र सरकार 60% फंड प्रदान करती है, जबकि राज्य 40% योगदान देते हैं। उत्तर-पूर्वी राज्यों में यह अनुपात 90:10 है।

इस योजना से खेती की उत्पादकता में वृद्धि होती है। आइसीएआर की रिपोर्ट के अनुसार, यंत्रीकरण से बीज और उर्वरक पर 15-20% खर्च बचता है। साथ ही, फसल चक्र में 5-20% सुधार आता है।

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ट्रैक्टर (SMAM) योजना के उद्देश्य

SMAM योजना का मुख्य उद्देश्य खेतों में मशीनरी का उपयोग बढ़ाना है। वर्तमान में भारत में कृषि शक्ति का अनुपात 2 किलोवाट प्रति हेक्टेयर है, जिसे 2.5 किलोवाट तक पहुंचाने का लक्ष्य है। यह सभी राज्यों में लागू है।

योजना के तहत प्रदर्शन परीक्षण, प्रशिक्षण और प्रदर्शन आयोजित किए जाते हैं। चार फार्म मशीनरी ट्रेनिंग एंड टेस्टिंग इंस्टीट्यूट (FMTTI) और आईसीएआर संस्थानों में मशीनों का परीक्षण होता है।

इससे छोटे किसानों को लाभ मिलता है। योजना कस्टम हायरिंग सेंटर्स स्थापित करती है, जो छोटी जोत वालों के लिए मशीनें किराए पर उपलब्ध कराते हैं। 2025 तक 10,000 से अधिक ऐसे सेंटर्स स्थापित करने का लक्ष्य है।


ट्रैक्टर योजना के घटक: विस्तृत जानकारी

प्रशिक्षण, परीक्षण और प्रदर्शन

योजना का पहला घटक कृषि यंत्रीकरण को मजबूत करना है। किसानों को ऑन-फील्ड और ऑफ-फील्ड ट्रेनिंग दी जाती है। 2024-25 में 50,000 से अधिक किसानों को प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

पोस्ट-हार्वेस्ट टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट (PHTM) के तहत भंडारण और मूल्य संवर्धन पर फोकस है। वित्तीय सहायता से PHT यूनिट्स स्थापित होते हैं, जो फसल नुकसान को 20% तक कम करते हैं।

कृषि मशीनरी खरीद पर वित्तीय सहायता

किसानों को मशीनरी खरीदने के लिए सब्सिडी मिलती है। सामान्य किसानों को 40% तक, जबकि महिलाओं, SC/ST और छोटे किसानों को 50% सब्सिडी अधिकतम 2.5 लाख रुपये तक।

ट्रैक्टर, पावर टिलर, सीड ड्रिल, हैरो और रीपर जैसी मशीनें शामिल हैं। 2025 में 80% तक सब्सिडी कुछ मामलों में उपलब्ध है।

कस्टम हायरिंग सेंटर्स और मशीनरी बैंक

विलेज लेवल फार्म मशीनरी बैंक (VLFMB) और कस्टम हायरिंग सेंटर्स (CHC) स्थापित किए जाते हैं। हाई-टेक हब्स उच्च मूल्य वाली फसलों जैसे गन्ना और कपास के लिए हैं।

इन सेंटर्स से किसान मशीनें किराए पर ले सकते हैं, जिससे व्यक्तिगत खरीद का बोझ कम होता है। 2025 तक 5,000 हाई-टेक हब्स का लक्ष्य है।

चयनित गांवों में यंत्रीकरण प्रोत्साहन

कम यंत्रीकृत राज्यों में चयनित गांवों को लक्षित किया जाता है। प्रति हेक्टेयर आधार पर वित्तीय सहायता दी जाती है। उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के लिए विशेष प्रावधान हैं।

इससे 15-20% श्रम दक्षता बढ़ती है। योजना से 17% विश्व जनसंख्या को समर्थन करने वाले भारत के लिए उत्पादकता महत्वपूर्ण है।


महिलाओं के लिए विशेष लाभ: ट्रैक्टर सब्सिडी

महिलाओं को SMAM योजना में प्राथमिकता मिलती है। पुरुष किसानों की तुलना में 10% अधिक सब्सिडी प्रदान की जाती है। 4.5 लाख रुपये के ट्रैक्टर पर 50% छूट से किसान को केवल 2.25 लाख रुपये चुकाने होते हैं।

उदाहरण के तौर पर, 4,50,000 रुपये के ट्रैक्टर पर सब्सिडी 2,25,000 रुपये है। सामान्य किसान को 40% पर 1,80,000 रुपये की छूट मिलती है, यानी 2,70,000 रुपये भुगतान। महिलाओं को 45,000 रुपये अतिरिक्त लाभ होता है।

यह सुविधा छोटी जोत वाली महिलाओं के लिए उपयोगी है। योजना से महिलाओं की खेती भागीदारी 30% बढ़ी है। 2025 में 40% लाभार्थी महिलाएं लक्षित हैं।

  • लाभ 1: मेहनत में 20% कमी, समय की बचत।

  • लाभ 2: उत्पादन में 15% वृद्धि, आय दोगुनी।

  • लाभ 3: कम निवेश से आधुनिक खेती संभव।


पात्रता मानदंड: कौन ले सकता है लाभ?

सभी भूमि धारक किसान परिवार, सेल्फ हेल्प ग्रुप्स (SHGs), यूजर ग्रुप्स, कोऑपरेटिव सोसाइटियां, FPOs और उद्यमी पात्र हैं। किसान भारतीय नागरिक होना चाहिए।

महिलाओं को प्राथमिकता है। आर्थिक रूप से कमजोर किसानों को लाभ। अन्य केंद्रीय योजनाओं से सब्सिडी न ले चुके किसान ही आवेदन कर सकते हैं।

2025 अपडेट के अनुसार, SC/ST/OBC के लिए अतिरिक्त आरक्षण है। छोटे किसान (2 हेक्टेयर से कम जोत) को 80% कवरेज लक्ष्य।

आवश्यक दस्तावेज: पूरी सूची

आवेदन के लिए दस्तावेज पूर्ण होने चाहिए। गलत जानकारी पर लाभ अस्वीकार हो सकता है।

  • आधार कार्ड: लाभार्थी पहचान के लिए।

  • बैंक पासबुक की पहली पेज की कॉपी: खाता विवरण के साथ।

  • भूमि रिकॉर्ड (खसरा/खतौनी): RoR प्रमाण।

  • पासपोर्ट साइज फोटो: एक।

  • ID प्रूफ: आधार के अलावा वोटर ID, पैन या ड्राइविंग लाइसेंस।

  • जाति प्रमाण पत्र: SC/ST/OBC के लिए।

  • महिला प्रमाण: राशन कार्ड या किसान पंजीकरण।

ये दस्तावेज डिजिटल रूप में अपलोड करें।

आवेदन प्रक्रिया: चरणबद्ध तरीके से

आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन है। कोई शुल्क नहीं लगता।

  1. आधिकारिक पोर्टल https://agrimachinery.nic.in या https://myscheme.gov.in पर जाएं।

  2. रजिस्ट्रेशन ड्रॉपडाउन से 'फार्मर' चुनें। आधार और मोबाइल से रजिस्टर करें।

  3. फॉर्म भरें: जिला, तहसील, ब्लॉक, गांव सही चुनें। नाम आधार के अनुसार।

  4. मशीन चयन करें, जैसे ट्रैक्टर।

  5. दस्तावेज अपलोड करें।

  6. सबमिट करें। वेरिफिकेशन के बाद DBT से सब्सिडी बैंक में।

एक ही सिटिंग में पूरा करें। स्थिति ट्रैकिंग https://agrimachinery.nic.in/index/ApplicationTracking पर।

योजना के लाभ: आंकड़ों में

SMAM से किसानों को कई फायदे मिलते हैं।

  • उत्पादकता वृद्धि: मशीनों से समय 15-20% कम, फसल चक्र 5-20% बढ़ा।

  • लागत बचत: बीज-उर्वरक पर 15-20% कमी।

  • आय वृद्धि: कम लागत से उपज दोगुनी, किसान आय 30% ऊपर।

  • कस्टम हायरिंग: छोटे किसानों के लिए मशीनें सुलभ, स्वामित्व बोझ कम।

  • जागरूकता: 1 लाख से अधिक डेमो, क्षमता निर्माण।

2025 तक 2.5 किलोवाट/हेक्टेयर लक्ष्य से खाद्य सुरक्षा मजबूत।

योजना की चुनौतियां और समाधान

कुछ क्षेत्रों में जागरूकता कम है। सरकार मोबाइल ऐप 'CHC-फार्म मशीनरी' से GPS नोटिफिकेशन दे रही है।

कम यंत्रीकृत राज्यों में फोकस बढ़ा। 2025 में डिजिटल प्लेटफॉर्म से 50% आवेदन लक्ष्य।

निष्कर्ष: अवसर का लाभ उठाएं

SMAM योजना खेती को आधुनिक बनाने का मजबूत माध्यम है। महिलाओं के लिए 50% ट्रैक्टर सब्सिडी से सशक्तिकरण सुनिश्चित। 2025 में बढ़ते बजट से अधिक किसान लाभान्वित होंगे। समय रहते आवेदन करें और उत्पादकता बढ़ाएं।

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