भारत-अमेरिका मक्का व्यापार में विवाद की जड़
22 सितंबर 2025 तक, भारत और अमेरिका के बीच मक्का व्यापार एक गंभीर चर्चा का विषय बना हुआ है। अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने हाल ही में भारत पर सवाल उठाए हैं कि 1.4 अरब की आबादी वाला देश अमेरिका से मक्का क्यों नहीं खरीदता।
इसके पीछे की मुख्य वजह जेनेटिकली मोडिफाइड (GM) फसलों पर भारत की सख्त नीति है। अमेरिका में लगभग 94% मक्का GM तकनीक से उगाया जाता है, जो भारतीय बाजार के लिए अनुपयुक्त है। भारत ने GM खाद्य फसलों के वाणिज्यिक उपयोग पर प्रतिबंध लगाया हुआ है, जिसके चलते अमेरिकी मक्का आयात संभव नहीं हो पाता।
इसके अलावा, भारत सरकार मक्के के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) निर्धारित करती है, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार से सस्ते मक्के की तुलना में काफी ऊंचा है। अगर अमेरिका से सस्ता GM मक्का आयात करने की अनुमति दी जाती है, तो घरेलू किसानों की आजीविका पर बुरा असर पड़ेगा।
इस साल जनवरी से चीन ने भी अमेरिका से मक्का आयात में कटौती की है, जिससे अमेरिका की नजर भारतीय बाजार पर बढ़ी है। हालांकि, भारत अपनी कृषि नीतियों पर अडिग है।
भारत का मक्का आयात: आंकड़े और रुझान
वित्तीय वर्ष 2024-25 में भारत का मक्का आयात रिकॉर्ड 9.7 लाख टन तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में छह गुना अधिक है। यह वृद्धि मुख्य रूप से इथेनॉल उत्पादन और पशुधन चारे की बढ़ती मांग के कारण हुई है। हालांकि, अमेरिका से आयात की राह में GM फसलों पर बैन बड़ी बाधा है। इसके बजाय, भारत म्यांमार, यूक्रेन और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों से गैर-GM मक्का आयात करता है, जहां शुल्क व्यवस्थाएं अनुकूल हैं और उत्पादन प्राकृतिक तरीकों से होता है।
दूसरी ओर, वित्तीय वर्ष 2023-24 में भारत का मक्का निर्यात 1.44 मिलियन मीट्रिक टन (MT) रह गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 58% कम है। यह चार सालों के निचले स्तर पर है। फिर भी, भारत दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों जैसे बांग्लादेश, वियतनाम, नेपाल, मलेशिया और श्रीलंका को मक्का और इसके उत्पाद निर्यात करता है। यह दर्शाता है कि भारत अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ निर्यात बाजार में भी सक्रिय है।
GM फसलों पर भारत की सख्ती: कारण और नीतियां
GM फसलें ऐसी फसलों को कहते हैं, जिनके जीन में कृत्रिम बदलाव करके पैदावार और गुणवत्ता बढ़ाई जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, ये बदलाव नेचुरल प्रक्रिया से नहीं होते। भारत में इन फसलों के कमर्शियल यूज पर 2002 के बाद से सख्ती बरती जा रही है, सिवाय बीटी कपास के। बीटी कपास की खेती को कीट नियंत्रण के लिए मंजूरी दी गई, लेकिन खाद्य फसलों में GM बीजों का उपयोग प्रतिबंधित है।
इसका एक बड़ा कारण किसानों और पर्यावरणविदों का विरोध है। GM फ्री भारत आंदोलन जैसे संगठनों का कहना है कि ये फसलें स्वास्थ्य और पर्यावरण को नुकसान पहुंचा सकती हैं। जुलाई 2025 में, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय में GM मक्का पर शोध को लेकर विरोध प्रदर्शन हुए, जिससे सरकार को हस्तक्षेप करना पड़ा। इसके अलावा, नीति आयोग की 2024 की रिपोर्ट में सुझाव दिया गया कि भारत को आत्मनिर्भरता के लिए गैर-GM फसलों पर ध्यान देना चाहिए।
GM फसलों के लाभ और जोखिम
GM फसलों के समर्थक कहते हैं कि ये फसलें पैदावार बढ़ाने, कीट प्रतिरोधक क्षमता और सूखा सहनशीलता में मदद करती हैं। उदाहरण के लिए, अमेरिका में GM मक्का की पैदावार प्रति हेक्टेयर 10-15% अधिक है। इसके अलावा, ये फसलें पोषण मूल्य और शेल्फ लाइफ बढ़ाने में भी सहायक हैं। दुनिया भर में 29 देशों में GM फसलों की खेती होती है, और इनके दुष्प्रभाव के प्रमाण सीमित हैं।
हालांकि, विरोधी पक्ष का तर्क है कि लंबे समय में ये फसलें पर्यावरण असंतुलन और स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकती हैं। भारत में अभी तक GM खाद्य फसलों पर व्यापक शोध नहीं हुआ है, इसलिए सरकार सावधानी बरत रही है। वर्ष 2014 में GM सोयाबीन तेल के आयात को मंजूरी दी गई थी, जो ब्राजील और अर्जेंटीना से आता है, लेकिन इसकी निगरानी सख्त है।
अमेरिका से मक्का आयात पर बैन की वजहें
भारत का मक्का आयात पर बैन लगाने के पीछे कई कारक हैं। सबसे पहला कारण यह है कि अमेरिका में उत्पादित मक्का ज्यादातर GM है, जो भारतीय नियमों के खिलाफ है। दूसरा, भारत सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) के जरिए किसानों को संरक्षण देती है।
वर्तमान में MSP अमेरिकी मक्के के अंतरराष्ट्रीय मूल्य से कहीं अधिक है। अगर सस्ते GM मक्के का आयात शुरू हुआ, तो घरेलू बाजार बिगड़ सकता है और लाखों किसानों की आजीविका खतरे में पड़ सकती है।
इसके साथ ही, भारत दो-स्तरीय टैरिफ दर कोटा (TRQ) सिस्टम लागू करता है, जिसमें उच्च शुल्क लगाकर आयात को नियंत्रित किया जाता है। इससे अमेरिकी मक्का भारत के लिए आर्थिक रूप से व्यवहार्य नहीं रह जाता। इसके बजाय, भारत म्यांमार, यूक्रेन और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों से गैर-GM मक्का आयात करता है, जहां शुल्क व्यवस्था अनुकूल है और फसलों की गुणवत्ता भारत के मानकों पर खरी उतरती है।
भारत की रणनीति और भविष्य
भारत की मक्का नीति स्पष्ट रूप से घरेलू कृषि और किसानों की सुरक्षा पर केंद्रित है। GM फसलों पर बैन और उच्च शुल्क व्यवस्था से अमेरिका जैसे देशों के साथ व्यापार में बाधा आती है, लेकिन यह भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक कदम है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में मक्का आयात और निर्यात पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा, क्योंकि वैश्विक मांग और ट्रेड वार्ता दोनों प्रभावित कर सकते हैं।
इस बीच, भारत को गैर-GM फसलों की खेती को बढ़ावा देना होगा ताकि आयात पर निर्भरता कम हो। नीति आयोग की सलाह के अनुसार, अगले पांच वर्षों में मक्का उत्पादन को 10% बढ़ाने का लक्ष्य है, जो आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सकारात्मक कदम होगा।
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