महाराष्ट्र में सितंबर में बाढ़ संकट
महाराष्ट्र में सितंबर 2025 के अंतिम चरण में मानसून ने अप्रत्याशित रूप से जोर पकड़ा। 20 सितंबर से शुरू हुई भारी वर्षा ने मराठवाड़ा, विदर्भ, खानदेश और पश्चिमी महाराष्ट्र के जिलों को बुरी तरह प्रभावित किया।
इससे न केवल फसलें नष्ट हुईं, बल्कि नदियों में उफान के कारण बाढ़ ने हजारों परिवारों को बेघर कर दिया। आंकड़ों के अनुसार, 43 लाख हेक्टेयर खरीफ फसल प्रभावित हुई, जो कुल खरीफ क्षेत्र का लगभग 30 प्रतिशत है।
सरकार के अनुसार, इस आपदा में कम से कम 16 लोगों की जान गई, जबकि 10 से अधिक घायल हुए। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की 17 टीमें तैनात की गईं, जिन्होंने 27 लोगों का निजात दिलाया।
फसल नुकसान की विस्तृत स्थिति
भारी वर्षा ने सोयाबीन, कपास, धान और बाजरा जैसी प्रमुख फसलों को लक्ष्य बनाया। मराठवाड़ा के धाराशिव, बीड़, लातूर और नांदेड़ जिलों में सबसे अधिक क्षति दर्ज की गई। उदाहरण के लिए, धाराशिव जिले के वाशी गांव में दो घंटे में 220 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई, जिससे 2,000 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र जलमग्न हो गया। राज्य स्तर पर, जून से अगस्त 2025 तक की वर्षा से 15.45 लाख हेक्टेयर फसल बर्बाद हुई।
सितंबर 2025 की अतिवृष्टि ने इस आंकड़े को दोगुना कर दिया। पशुधन को भी नुकसान पहुंचा, जहां सैकड़ों पशु बह गए या बीमार पड़े। किसानों ने बताया कि उर्वरक भूमि धुलकर चली गई, जिससे अगले मौसम की बुआई प्रभावित होगी।
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प्रभावित क्षेत्र: मराठवाड़ा (40%), विदर्भ (25%), पश्चिम महाराष्ट्र (20%)।
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नष्ट फसलें: सोयाबीन (35%), कपास (28%), धान (20%)।
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आर्थिक हानि: प्रारंभिक अनुमान में 5,000 करोड़ रुपये से अधिक।
सरकार की तत्काल राहत पहल
महाराष्ट्र सरकार ने 24 सितंबर 2025 को कैबिनेट बैठक में 2,215 करोड़ रुपये का राहत पैकेज स्वीकृत किया। यह राशि राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) से जारी की जाएगी।
डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे ने 23 सितंबर को पुणे में पत्रकारों से कहा, "हम किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। पंचनामा पूरा होते ही सहायता वितरित होगी।" उन्होंने जोर दिया कि जून-अगस्त की क्षति के लिए 1,339 करोड़ रुपये पहले ही आवंटित हैं।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 24 सितंबर को सोलापुर और लातूर का हवाई सर्वेक्षण किया। उन्होंने स्थानीय अधिकारियों को मुआवजे के मानदंडों में ढील देने के निर्देश दिए। इसके अलावा, 50 टेम्पो ट्रकों में राहत सामग्री भेजी गई, जिसमें खाद्य, चिकित्सा और सफाई किट शामिल हैं।
केंद्र सरकार से सहायता की मांग
25 सितंबर 2025 को मुंबई में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के दौरे के दौरान फडणवीस और शिंदे ने मुलाकात की। उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के लिए विशेष पैकेज की मांग की। 26 सितंबर को नई दिल्ली में फडणवीस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भेंट कर नेशनल डिजास्टर रिलीफ फंड (एनडीआरएफ) से सहायता का अनुरोध किया।
शिंदे ने कहा, "केंद्र ने हमेशा संकट में साथ दिया है। हम 50 लाख हेक्टेयर क्षति का विस्तृत विवरण सौंप चुके हैं।" इसके परिणामस्वरूप, केंद्र ने तत्काल 500 करोड़ रुपये की अग्रिम राशि जारी करने पर विचार किया। यह कदम किसानों को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) के माध्यम से पहुंचेगा।
राहत वितरण की प्रक्रिया
पंचनामा प्रक्रिया को तेज करने के लिए 31 जिलों में 200 से अधिक टीमों को लगाया गया। प्रत्येक जिले की वेबसाइट पर लाभार्थी सूची अपलोड होगी। शिंदे ने 25 सितंबर को धाराशिव जिले के करंजा गांव का दौरा किया, जहां उन्होंने प्रभावित किसानों से सीधे बात की।
उन्होंने आश्वासन दिया कि घर पुनर्निर्माण, पशुधन क्षति और फसल नुकसान के लिए अलग-अलग मदें होंगी। सरकार का लक्ष्य है कि 31 लाख से अधिक किसानों को 15 अक्टूबर 2025 तक पहली किस्त मिल जाए।
डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की भूमिका
एकनाथ शिंदे ने बाढ़ प्रबंधन में सक्रिय भूमिका निभाई। 22 सितंबर को उन्होंने मराठवाड़ा के प्रत्येक कलेक्टर से फोन पर स्थिति जानी। 24 सितंबर को धाराशिव में एनडीआरएफ नाव से प्रभावित गांवों का दौरा किया। उन्होंने शिवसेना विधायकों और मंत्रियों को एक माह का वेतन दान करने का ऐलान किया, जो राहत कोष में जाएगा। शिंदे ने जोर दिया, "राजनीति के बजाय खेतों में उतरें। किसानों की आंसू देखें।" उनकी यह अपील विपक्ष की आलोचना का जवाब थी।
विपक्ष की मांगें और आलोचना
महाराष्ट्र कांग्रेस प्रमुख हर्षवर्धन सपकल ने 27 सितंबर को घोषित राहत को "नगण्य" बताया। उन्होंने कहा कि 2,215 करोड़ रुपये 31 लाख किसानों के लिए अपर्याप्त है। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने प्रति हेक्टेयर 50,000 रुपये मुआवजा और सभी किसान ऋण माफी की मांग की। 27 सितंबर को उन्होंने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का सुझाव दिया। ठाकरे ने सत्ताधारी दल पर हमला बोला, "शासन की समझ नहीं।" विपक्ष ने राहत किटों पर नेताओं के फोटो लगाने की भी निंदा की।
राजनीतिक बहस का प्रभाव
यह विवाद राहत कार्यों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, सरकार ने विपक्ष को सकारात्मक सुझाव देने का आह्वान किया। विपक्ष की मांगें किसानों के बीच चर्चा का विषय बनीं, जिससे दबाव बढ़ा।
दीर्घकालिक उपाय और सबक
बाढ़ संकट ने जल संरक्षण की आवश्यकता उजागर की। सरकार ने 2026 से ड्रोन-आधारित निगरानी और जलाशय प्रबंधन पर 1,000 करोड़ रुपये खर्च करने का प्लान बनाया। किसानों के लिए बीमा योजनाओं को मजबूत किया जाएगा, जहां प्रीमियम सब्सिडी बढ़ाई जाएगी। विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन से ऐसी घटनाएं बढ़ेंगी, इसलिए जल संग्रहण पर फोकस जरूरी। इसके अलावा, साथी रोगों से बचाव के लिए 100 स्वास्थ्य शिविर लगाए गए।
किसानों के लिए आशा की किरण
महाराष्ट्र सरकार का दिवाली से पहले मुआवजा वितरण प्लान किसानों को आर्थिक स्थिरता प्रदान करेगा। एकनाथ शिंदे की सक्रियता और केंद्र की सहायता से स्थिति सुधरेगी। हालांकि, विपक्ष की मांगें राहत पैकेज को और मजबूत बना सकती हैं। कुल मिलाकर, यह आपदा प्रबंधन में समन्वय का उदाहरण बनेगा। किसान अब पुनर्वास की ओर बढ़ रहे हैं।
