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मराठवाड़ा बाढ़: उद्धव ठाकरे की कर्ज माफी मांग, किसानों को 50 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर सहायता की अपील

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मराठवाड़ा बाढ़

मराठवाड़ा, जो पहले से ही सूखाग्रस्त क्षेत्र के रूप में जाना जाता है, इस बार विपरीत परिस्थिति का शिकार हुआ। 20 सितंबर से 27 सितंबर 2025 तक औसतन 200-300 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई, जो सामान्य से 150% अधिक है।

इससे गोदावरी, ताप्ती और मनजरा जैसी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बहने लगीं। बीड, लातूर, धाराशिव, जालना, नांदेड़ और छत्रपति संभाजीनगर जैसे 11 जिलों में सबसे अधिक नुकसान हुआ।

सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 40 लाख किसान प्रभावित हैं, जिनकी 70 लाख एकड़ फसलें नष्ट हो चुकी हैं। पशुधन में भी 500 से अधिक जानवर बह गए।

इसके अलावा, 10,000 से ज्यादा घर क्षतिग्रस्त हो गए, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था ठप हो गई। विशेषज्ञों का कहना है कि ऊपरी मिट्टी के बहाव से भूमि की उर्वरता 3 से 5 वर्षों तक प्रभावित रहेगी।

इस संकट ने न केवल वर्तमान फसल चक्र को बाधित किया, बल्कि रबी मौसम की तैयारी को भी मुश्किल बना दिया। किसानों को बीज, खाद और सिंचाई के लिए अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत पड़ेगी।

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उद्धव ठाकरे का मराठवाड़ा दौरा

25 सितंबर 2025 को शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मराठवाड़ा के पांच जिलों लातूर, धाराशिव, बीड़, जालना और छत्रपति संभाजीनगर का दौरा किया। उन्होंने प्रभावित किसानों से सीधे मुलाकात की और खेतों का जायजा लिया।

ठाकरे ने एक मीडिया कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह कर्ज माफी का सही समय है। उन्होंने राज्य सरकार से किसानों का पूरा ऋण माफ करने की मांग की, जैसा कि उनकी पूर्व सरकार ने 2019-2022 में किया था। इसके साथ ही, प्रति हेक्टेयर 50,000 रुपये की तत्काल राहत राशि घोषित करने का आग्रह किया। ठाकरे ने जोर देकर कहा कि बाढ़ से प्रभावित 30,000 हेक्टेयर भूमि के लिए कम से कम 1,500 करोड़ रुपये का पैकेज जरूरी है।

उन्होंने विधानमंडल के विशेष सत्र बुलाने की भी मांग की, जहां किसानों की समस्याओं पर विस्तृत चर्चा हो। ठाकरे के अनुसार, वर्तमान सहायता राशि जो 8,000-10,000 रुपये प्रति किसान है नाकाफी है, क्योंकि सफाई और मरम्मत में ही यह खर्च हो जाएगी।


केंद्र सरकार पर उद्धव ठाकरे का तीखा प्रहार

ठाकरे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पंजाब में प्रति हेक्टेयर 50,000 रुपये की सहायता दी जा रही है, लेकिन महाराष्ट्र के किसानों की उपेक्षा हो रही है। बिहार चुनाव को ध्यान में रखते हुए वहां 'पैसे की बारिश' हो रही है, लेकिन मराठवाड़ा के 40 लाख किसानों की सुध लेने वाला कोई नहीं। ठाकरे ने पीएम केयर्स फंड से तत्काल 10,000 करोड़ रुपये की मदद जारी करने की मांग की।

एक व्यंग्यात्मक टिप्पणी में उन्होंने कहा, 'प्रधानमंत्री ने मंगलसूत्र चोरी का मुद्दा उठाया था, अब किसानों का मंगलसूत्र बचाइए।' यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और विपक्षी दलों ने इसका समर्थन किया। ठाकरे ने याद दिलाया कि 2024 विधानसभा चुनाव में भाजपा ने कर्ज माफी का वादा किया था, लेकिन एक वर्ष बाद भी अमल नहीं हुआ। उन्होंने बैंकों को निर्देश देने की मांग की कि कर्ज वसूली के नोटिस रोके जाएं।


राज्य सरकार की प्रतिक्रिया और राहत उपाय

महाराष्ट्र सरकार ने बाढ़ प्रभावित किसानों को दिवाली से पहले राहत राशि पहुंचाने का आश्वासन दिया है। उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने 27 सितंबर 2025 को कहा कि 45,000 करोड़ रुपये की लाड़की बहिन योजना के तहत महिलाओं को 1,500 रुपये मासिक मदद मिल रही है, जो आपदा से उबरने में सहायक होगी।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने 26 सितंबर को दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की और केंद्र से अतिरिक्त सहायता मांगी। सरकार ने 14,000 करोड़ रुपये की पूर्व घोषित सहायता का उल्लेख किया, लेकिन ठाकरे ने दावा किया कि यह किसानों तक नहीं पहुंची।

राहत कार्यों में एनजीओ और स्थानीय विधायकों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। हालांकि, विपक्ष ने पंचनामा प्रक्रिया को धीमी बताते हुए आलोचना की।

  • प्रमुख राहत उपाय:
    • प्रति हेक्टेयर 10,000 रुपये की प्रारंभिक सहायता।

    • बीज और खाद के लिए 5,000 रुपये सब्सिडी।

    • पशुधन क्षतिपूर्ति के लिए 20,000 रुपये प्रति जानवर।

    • घर मरम्मत के लिए 50,000 रुपये तक अनुदान।

ये उपाय 27 सितंबर तक 50% प्रभावित परिवारों तक पहुंच चुके हैं।


किसानों की वास्तविक चुनौतियां और दीर्घकालिक प्रभाव

बाढ़ ने किसानों को बहुआयामी संकट में डाल दिया। खेतों में नदी का पानी भरने से मिट्टी का कटाव हुआ, जो उर्वरता को प्रभावित करेगा। विशेषज्ञों के अनुसार, 70 लाख एकड़ भूमि पर रबी फसल बोना मुश्किल होगा। किसानों पर औसतन 2-3 लाख रुपये का कर्ज है, जो ब्याज के साथ बढ़ रहा। 2025 में मराठवाड़ा में 200 से अधिक किसान आत्महत्याओं की रिपोर्ट आई हैं, जिनमें 31 वर्षीय एक युवक का मामला प्रमुख है, जिसका शिशु मात्र 15 दिन का था।

ठाकरे ने कहा कि फसलें सड़ रही हैं और किसान जीविका के लिए रो रहे हैं। बिना गारंटीड मूल्य के उनकी आय पहले ही कम थी, अब यह शून्य हो गई। दीर्घकालिक रूप से, जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी घटनाएं बढ़ेंगी। सरकार को बाढ़ प्रबंधन के लिए 500 करोड़ रुपये का विशेष फंड बनाने की जरूरत है।

अन्य राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और भविष्य की संभावनाएं

कांग्रेस नेता संजय राउत ने 24 सितंबर को कहा कि 36 लाख किसान प्रभावित हैं और सरकार राहत पैकेट पर पार्टी प्रतीक चिपका रही है। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर संवेदना व्यक्त की और राहत तेज करने का आग्रह किया। शिवसेना (यूबीटी) ने 11 अक्टूबर 2025 को मराठवाड़ा में विरोध मार्च की योजना बनाई है। ठाकरे ने कहा कि यदि मांगें पूरी न हुईं, तो सड़क पर आंदोलन होगा।

राज्य सरकार ने राजनीति से दूर रहने की अपील की, लेकिन विपक्ष ने इसे 'नौटंकी' बताया। मंत्री राधाकृष्ण विखे पाटील ने ठाकरे पर सत्ता से बाहर होने के बाद हमदर्दी दिखाने का आरोप लगाया। भविष्य में, केंद्र से 10,000 करोड़ का पैकेज मिलना चाहिए, जो सीधे किसानों के खातों में जाए। इससे अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।

उद्धव ठाकरे का क्रिकेट और सोनम वांगचुक का जिक्र

ठाकरे ने बाढ़ के अलावा अन्य मुद्दों पर भी टिप्पणी की। भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच को लेकर उन्होंने कहा कि जब पाकिस्तान आतंकवादी भेज रहा है, तब उसके साथ खेलना शर्मनाक है। स्पॉन्सर कंपनियों को बहिष्कार का आह्वान किया। सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार विरोधियों को दबा रही है।

ये टिप्पणियां राजनीतिक बहस को गहरा रही हैं। मराठवाड़ा बाढ़ ने महाराष्ट्र की कृषि नीतियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। तत्काल राहत के साथ दीर्घकालिक योजना जरूरी है। सरकार की प्रतिक्रिया भविष्य की आपदाओं के प्रबंधन को निर्धारित करेगी।

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