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अतिवृष्टि के बाद कपास की फसल की देखभाल (Care After Heavy Rainfall)

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परिचय (Introduction)

चालू खरीप हंगाम 2025 (Kharif season 2025) में सितंबर माह में भारी बारिश (heavy rainfall) हुई है, और मौसम विभाग (meteorological department) ने अगले कुछ दिनों में और वर्षा की संभावना जताई है। इस अतिवृष्टि ने कपास की फसल (cotton crop) पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है, जिसके कारण सही प्रबंधन (management) की आवश्यकता है। इस लेख में, हम अतिवृष्टि के प्रभाव, पोषक तत्वों की कमी (nutrient deficiency), रोग और कीट प्रबंधन (disease and pest management) के उपायों पर चर्चा करेंगे।

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अतिवृष्टि का कपास की फसल पर प्रभाव (Impact of Heavy Rainfall on Cotton Crop)

अतिवृष्टि के कारण खेतों में पानी जमा (waterlogging) हो जाता है, जो कपास की जड़ों (roots) को ऑक्सीजन (oxygen) की आपूर्ति रोकता है। यह फसल की वृद्धि (growth) को प्रभावित करता है। प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि पानी कितने समय तक जमा रहा और फसल की उम्र (crop age) क्या है।

  • जड़ों पर प्रभाव (Root Impact) : कपास की जड़ों को वृद्धि के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। पानी जमा होने से जड़ों की वृद्धि रुकती है, जिससे पौधे कमजोर (weak) और पीलापन (yellowing) लिए दिखते हैं।

  • पोषक तत्वों की कमी (Nutrient Deficiency) : जलभराव के कारण नाइट्रोजन (nitrogen), फॉस्फोरस (phosphorus), और पोटाश (potash) जैसे आवश्यक पोषक तत्वों का अवशोषण (absorption) बाधित होता है।

  • रोग और कीट (Diseases and Pests) : अधिक आर्द्रता (humidity) के कारण आकस्मिक मर रोग (para wilt), पातेगळ (leaf fall), और बोंड सड (boll rot) जैसी समस्याएं बढ़ती हैं।

  • उपज और गुणवत्ता (Yield and Quality) : जलभराव से कटाई में देरी (delayed harvesting) और अपरिपक्व धागों (immature fibers) की मात्रा बढ़ने से गुणवत्ता (quality) पर असर पड़ता है।


अतिरिक्त पानी का प्रबंधन (Waterlogging Management)

पानी का निचरा (drainage) करना अतिवृष्टि के बाद सबसे महत्वपूर्ण कदम है। इसके लिए निम्नलिखित उपाय करें:

  • नालियां खोदें (Dig Drains) : खेत में उतार के समानांतर नालियां (drains) बनाकर अतिरिक्त पानी को बाहर निकालें।

  • सरी खोलें (Open Furrows) : वरंबों पर लगाए गए कपास के पौधों के लिए सरी (furrows) को खुला रखें ताकि पानी आसानी से निकल जाए।

  • पंप का उपयोग (Use Pumps) : यदि संभव हो, तो सखल भागों (low-lying areas) से पानी को पंप (pump) करके निकालें।

  • खुरपणी और कोलपनी (Weeding and Hoeing) : वाफसा आने पर खुरपणी (weeding) और कोलपनी (hoeing) करें ताकि मिट्टी में हवा का संचार (aeration) हो।


पोषक तत्वों का प्रबंधन (Nutrient Management)

जलभराव के बाद कपास के पौधों को पोषक तत्वों (nutrients) की आपूर्ति करना महत्वपूर्ण है। इसके लिए निम्नलिखित उपाय करें:

  • फॉलीअर स्प्रे (Foliar Spray) : 19:19:19 या डायअमोनियम फॉस्फेट (DAP) को 1% (10 ग्राम प्रति लीटर पानी) की दर से 7 दिन के अंतराल पर छिड़काव (spray) करें।

  • शेंडा खुडाई में देरी (Delay Topping) : यदि पौधे शेंडा खुडाई (topping) की अवस्था में हैं, तो जलभराव के कारण वृद्धि मंद होने पर इसे 7 दिन के लिए टालें।

  • संप्रेरक का उपयोग (Hormone Use) : जल्दबाजी में NAA या अन्य संप्रेरकों (hormones) का छिड़काव न करें। मिट्टी सूखने और सूर्यप्रकाश (sunlight) मिलने पर पौधे सामान्य वृद्धि (normal growth) शुरू करेंगे।


रोग और कीट नियंत्रण (Disease and Pest Control)

आकस्मिक मर रोग (Para Wilt)

लक्षण (Symptoms) : जलभराव के बाद अचानक पौधे सूखने (wilting) लगते हैं। पत्तियां, फूल, और बोंड (bolls) झड़ने लगते हैं। यह कोई बुरशी, जिवाणु, या विषाणु (fungus, bacteria, virus) के कारण नहीं होता, बल्कि जलवाहिनियों (vascular tissues) के बंद होने से होता है।

उपाय (Solutions) :

  • झुके हुए पौधों को सीधा करें और मिट्टी डालकर दबाएं।

  • 250 ग्राम कॉपर ऑक्सिक्लोराइड (copper oxychloride) + 1.5 किलो यूरिया (urea) + 1.5 किलो पोटाश (potash) को 100 लीटर पानी में मिलाकर 150-200 मिली प्रति पौधे की दर से आलवणी (drenching) करें।

  • 8-10 दिन बाद 2 किलो DAP प्रति 100 लीटर पानी की दर से आलवणी करें।

  • बुरशीजन्य रोगों (fungal diseases) के लिए शिफारसित बुरशीनाशक (fungicides) का उपयोग करें।

पातेगळ (Leaf Fall)

लक्षण (Symptoms) : बारिश के लंबे अंतराल के बाद अचानक भारी बारिश से पत्तियां झड़ने (leaf shedding) लगती हैं।

उपाय (Solutions) :

  • नॅप्थिल ॲसेटीक ॲसिड (NAA) 20 पी.पी.एम. (20 मिलीग्राम प्रति लीटर पानी) का छिड़काव करें। अन्य रसायनों (chemicals) को न मिलाएं।

  • फूल और बोंड विकास (boll development) के समय DAP (2%) का छिड़काव 15 दिन के अंतराल पर दो बार करें।

  • सूक्ष्म पोषक तत्वों (micronutrients) की कमी को दूर करने के लिए मायक्रोन्यूट्रिएंट ग्रेड 2 (0.5%) और बोरॉन (0.1%) का छिड़काव करें।

बोंड सड (Boll Rot)

लक्षण (Symptoms) : अधिक आर्द्रता और ढगाळ वातावरण (cloudy weather) के कारण बोंड खुलने में देरी होती है, और निचले हिस्से की बोंड सड़ने (boll rot) लगती हैं।

उपाय (Solutions) :

  • रस शोषक कीटों (sucking pests) का नियंत्रण करें।

  • सूखी पंखुड़ियों (dried petals) को हटाएं।

  • नाइट्रोजन युक्त उर्वरकों (nitrogen fertilizers) का अति प्रयोग न करें।

  • आंतरिक बोंड सड के लिए कॉपर ऑक्सिक्लोराइड (2.5 ग्राम प्रति लीटर) और बाह्य बोंड सड के लिए कार्बेन्डाझिम (0.4 ग्राम प्रति लीटर) या प्रोपिकोनॅझोल (1 मिली प्रति लीटर) का छिड़काव करें।

अतिवृष्टि के बाद कपास की फसल की देखभाल के लिए टिप्स (Tips for Cotton Crop Care After Heavy Rainfall)

  • खेत में जल निकास (drainage) को प्राथमिकता दें।

  • पौधों की वृद्धि (growth) सामान्य होने तक संप्रेरकों (hormones) का उपयोग टालें।

  • रोग और कीटों (diseases and pests) पर नियमित निगरानी रखें।

  • पोषक तत्वों (nutrients) की आपूर्ति के लिए फॉलीअर स्प्रे (foliar spray) का उपयोग करें।

  • कटाई (harvesting) में देरी होने पर धागों की गुणवत्ता (fiber quality) पर ध्यान दें।

सितंबर 2025 में हुई अतिवृष्टि (heavy rainfall) ने कपास की फसल (cotton crop) को प्रभावित किया है। सही जल प्रबंधन (water management), पोषक तत्वों की आपूर्ति (nutrient supply), और रोग-कीट नियंत्रण (disease-pest control) से नुकसान को कम किया जा सकता है। वैज्ञानिक उपायों (scientific measures) का समय पर उपयोग करके उपज (yield) और गुणवत्ता (quality) को बनाए रखें।

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