मॉनसून में भैंसों की देखभाल क्यों जरूरी?
मॉनसून का मौसम नमी और बारिश के कारण भैंसों की सेहत के लिए चुनौतीपूर्ण होता है। इस दौरान उचित देखभाल और प्रबंधन से न केवल उनकी सेहत बनी रहती है, बल्कि दूध उत्पादन में भी वृद्धि होती है। लसीकरण, स्वच्छता, संतुलित आहार और समय पर उपचार इस मौसम में विशेष रूप से महत्वपूर्ण हैं। यह लेख पशुपालकों के लिए उपयोगी और व्यावहारिक सुझाव प्रदान करता है, जो उनकी भैंसों की सेहत और मुनाफे को बढ़ाने में मदद करेंगे।
लसीकरण: रोगों से बचाव का पहला कदम
लसीकरण भैंसों को मॉनसून के दौरान होने वाली बीमारियों से बचाने का सबसे प्रभावी तरीका है। निम्नलिखित लसीकरण मॉनसून शुरू होने से पहले करवाएं:
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घटसर्प (एचएस) : यह रोग मॉनसून में तेजी से फैल सकता है। समय पर लसीकरण से भैंसों को सुरक्षित रखें।
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फऱ्या (एफएमडी) : खुरपका-मुंहपका रोग से बचाव के लिए यह लस अनिवार्य है।
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ब्रुसेलोसिस : 4 से 12 वर्ष की मादा भैंसों को यह लस देनी चाहिए, जो गर्भपात की समस्या को कम करती है।
पशु चिकित्सक की सलाह से लसीकरण का समय और खुराक निर्धारित करें। यह न केवल रोगों से बचाव करता है, बल्कि पशुपालकों के आर्थिक नुकसान को भी कम करता है।
स्वच्छता: बीमारियों से बचाव का आधार
मॉनसून में नमी के कारण गोठों में गंदगी और रोगों का खतरा बढ़ जाता है। स्वच्छता बनाए रखने के लिए निम्नलिखित उपाय अपनाएं:
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गोठे की सफाई : गोठे को सूखा और साफ रखें। गीले स्थानों पर रोगाणु पनप सकते हैं।
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त्वचा की देखभाल : नमी के कारण त्वचा रोग बढ़ सकते हैं। भैंसों की त्वचा को नियमित रूप से साफ करें और सूखा रखें।
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दोहन के बाद स्वच्छता : भैंसों के मजबूत स्नायुओं के कारण दोहन के बाद सड के छिद्र जल्दी बंद हो जाते हैं, जिससे कासेचे रोग का खतरा कम होता है। फिर भी, दोहन के बाद सड की सफाई जरूरी है।
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पान्हा चोरी : इस समस्या के लिए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन से बचें। प्राकृतिक वनस्पति-आधारित उपचार जैसे हर्बल दवाओं का उपयोग करें।
संतुलित आहार: सेहत और दूध उत्पादन का आधार
भैंसों की सेहत और दूध उत्पादन के लिए संतुलित आहार महत्वपूर्ण है। निम्नलिखित बिंदुओं पर ध्यान दें:
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पचन की निगरानी : भैंस के गोबर की जांच करें। ढीला या असामान्य गोबर पाचन समस्याओं का संकेत हो सकता है।
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चारे की गुणवत्ता : कच्ची ज्वार का चारा विषाक्त हो सकता है। इसे देने से पहले पशु चिकित्सक से सलाह लें। बाहर चराने से पहले भैंसों के मुंह पर मुंगसा बांधें।
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गर्भपात का प्रबंधन : गर्भपात होने पर प्लास्टिक दस्ताने पहनकर गर्भाशय की सफाई करें और तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क करें।
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प्रसव के बाद की देखभाल : प्रसव के पहले और बाद में दुग्धज्वर, रक्तमूत्रता और कीटोसिस जैसी समस्याओं से बचने के लिए पशु चिकित्सक की सलाह लें।
शारीरिक स्वास्थ्य: छोटी सावधानियां, बड़ा प्रभाव
भैंसों की शारीरिक सेहत बनाए रखने के लिए निम्नलिखित उपाय अपनाएं:
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खुरों की देखभाल : खुरों में चोट या लंगड़ापन दूध उत्पादन को प्रभावित करता है। नियमित रूप से खुरों की कटाई और उपचार करें।
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नियमित सफाई : भैंसों की आंखें, कान और शरीर की नियमित सफाई से रोगों का खतरा कम होता है।
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पाचन समस्याएं : पोटफुगी या अपचन से बचने के लिए आहार का उचित प्रबंधन करें। संतुलित चारा और खनिज पूरक दें।
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नियमित स्वास्थ्य जांच : हर छह महीने में पशु चिकित्सक से भैंसों की जांच करवाएं।
दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए जरूरी कदम
दूध उत्पादन को बढ़ाने और भैंसों की सेहत को बनाए रखने के लिए निम्नलिखित सुझाव अपनाएं:
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नियमित निगरानी : दूध की मात्रा की रोजाना नोंद रखें। प्रसव से दो महीने पहले भैंस को आटवाएं।
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प्राकृतिक उपचार : रासायनिक दवाओं के बजाय प्राकृतिक उपचारों को प्राथमिकता दें।
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पशु चिकित्सक की सलाह : किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लें।
पशुपालकों के लिए लाभकारी सुझाव
नियोजित देखभाल और प्रबंधन से पशुपालक भैंसों की सेहत में सुधार कर सकते हैं और दूध उत्पादन बढ़ा सकते हैं। नियमित लसीकरण, स्वच्छता और संतुलित आहार न केवल भैंसों को स्वस्थ रखते हैं, बल्कि पशुपालकों को आर्थिक लाभ भी दिलाते हैं। प्राकृतिक उपचारों का उपयोग और पशु चिकित्सक की सलाह से रासायनिक दवाओं पर निर्भरता कम करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
मॉनसून से पहले भैंसों को कौन-सी लसें देनी चाहिए?
घटसर्प (एचएस), फऱ्या (एफएमडी) और 4 से 12 साल की मादा भैंसों को ब्रुसेलोसिस की लस देनी चाहिए।
भैंसों में कासेचे रोग क्यों कम होते हैं?
भैंसों के मजबूत स्नायुओं के कारण दोहन के बाद सड के छिद्र जल्दी बंद हो जाते हैं, जिससे कासेचे रोग का खतरा कम होता है।
पान्हा चोरी होने पर क्या करें?
ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन के बजाय प्राकृतिक वनस्पति-आधारित उपचारों का उपयोग करें।
प्रसव के बाद दुग्धज्वर और कीटोसिस से कैसे बचें?
प्रसव से पहले और बाद में पशु चिकित्सक की सलाह से उचित उपाय करें।
दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए क्या जरूरी है?
नियमित लसीकरण, स्वच्छता, संतुलित आहार, स्वास्थ्य जांच और समय पर उपचार।
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