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Pre-EMI vs Full EMI: अंडर-कंस्ट्रक्शन होम लोन का पूरा गाइड

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अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी की लोकप्रियता और चुनौतियाँ

भारतीय रियल एस्टेट मार्केट में अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी की मांग तेजी से बढ़ रही है। ये प्रॉपर्टीज़ आकर्षक कीमतों, आधुनिक डिज़ाइनों, और लचीले पेमेंट शेड्यूल के कारण पहली बार घर खरीदने वालों और युवा पेशेवरों के बीच लोकप्रिय हैं। लेकिन, इन प्रॉपर्टीज़ में निवेश करने से पहले कुछ चुनौतियों को समझना ज़रूरी है।

क्यों हैं अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टीज़ खास?

  • कम कीमत : शुरुआती चरण में बुकिंग करने पर प्रॉपर्टी की कीमत पूरी तरह तैयार प्रॉपर्टी की तुलना में कम होती है।

  • पसंद की आज़ादी : खरीदार अपनी पसंद का फ्लोर, व्यू, या लेआउट चुन सकते हैं।

  • लचीला पेमेंट प्लान : बिल्डर और बैंक निर्माण की प्रगति के आधार पर पेमेंट शेड्यूल प्रदान करते हैं।

हालांकि, इन प्रॉपर्टीज़ का सबसे बड़ा जोखिम यह है कि वे अभी पूरी तरह तैयार नहीं होतीं। इस कारण बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा होम लोन की प्रक्रिया में अतिरिक्त सावधानी बरती जाती है। यहीं पर प्री-ईएमआई और फुल-ईएमआई की अवधारणा महत्वपूर्ण हो जाती है।

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प्री-ईएमआई क्या है? (What is pre-EMI?)

प्री-ईएमआई (Pre-EMI) वह भुगतान है जिसमें आप केवल उस लोन राशि पर ब्याज चुकाते हैं जो अब तक बिल्डर को डिस्बर्स की गई है। इसमें मूलधन (Principal) का भुगतान शामिल नहीं होता। यह सिस्टम तब तक लागू रहता है जब तक प्रॉपर्टी का निर्माण पूरा नहीं हो जाता।

प्री-ईएमआई का उदाहरण

मान लीजिए, आपने ₹50 लाख का होम लोन लिया है, जिसकी ब्याज दर 8.5% है। यदि बैंक शुरुआत में केवल ₹10 लाख डिस्बर्स करता है, तो आपकी प्री-ईएमआई होगी:

(10,00,000 × 8.5%) ÷ 12 = लगभग ₹7,083 प्रति माह

जैसे-जैसे निर्माण आगे बढ़ता है और अधिक राशि डिस्बर्स होती है, प्री-ईएमआई की राशि बढ़ती जाती है। उदाहरण के लिए, यदि डिस्बर्सल ₹20 लाख तक पहुँच जाता है, तो प्री-ईएमआई बढ़कर लगभग ₹14,167 प्रति माह हो जाएगी।

प्री-ईएमआई क्यों दी जाती है?

  • कम बोझ : निर्माण अवधि के दौरान खरीदार पर कम वित्तीय दबाव पड़ता है।

  • बैंक का जोखिम कम : प्रॉपर्टी पूरी तरह तैयार न होने के कारण बैंक के पास पूर्ण संपार्श्विक (Collateral) नहीं होता। प्री-ईएमआई से बैंक का जोखिम नियंत्रित रहता है।


फुल-ईएमआई क्या है? (What is a full-EMI loan?)

फुल-ईएमआई (Full EMI) तब शुरू होती है जब प्रॉपर्टी का निर्माण पूरा हो जाता है और बैंक पूरी लोन राशि डिस्बर्स कर देता है। इसमें ब्याज और मूलधन दोनों शामिल होते हैं।

फुल-ईएमआई का उदाहरण

उसी ₹50 लाख के लोन पर, यदि ब्याज दर 8% है और लोन की अवधि 20 साल है, तो फुल-ईएमआई होगी:

लगभग ₹43,391 प्रति माह

फुल-ईएमआई शुरू होने पर प्री-ईएमआई में चुकाया गया ब्याज मूलधन में समायोजित हो जाता है, जिससे लोन की कुल लागत पर कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ता।


कंस्ट्रक्शन-लिंक्ड पेमेंट प्लान

अधिकतर बैंक और वित्तीय संस्थान अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी के लिए कंस्ट्रक्शन-लिंक्ड पेमेंट प्लान (Construction-Linked Payment Plan) अपनाते हैं। इसमें लोन राशि चरणबद्ध रूप से डिस्बर्स की जाती है। उदाहरण के लिए:

  • 20% : नींव पूरी होने पर

  • 20% : दूसरी मंज़िल पूरी होने पर

  • 20% : चौथी मंज़िल पूरी होने पर

  • 20% : छठी मंज़िल पूरी होने पर

  • 10% : ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट मिलने पर

  • 5% : अंतिम हैंडओवर पर

हर डिस्बर्सल के साथ प्री-ईएमआई बढ़ती है, इसलिए खरीदार को वित्तीय योजना पहले से तैयार रखनी चाहिए।


प्री-ईएमआई और फुल-ईएमआई: मुख्य अंतर

बिंदु

प्री-ईएमआई

फुल-ईएमआई

भुगतान

केवल ब्याज

ब्याज + मूलधन

शुरुआत

निर्माण अवधि में

निर्माण पूरा होने पर

खरीदार पर प्रभाव

शुरुआती बोझ कम

मूलधन और ब्याज दोनों चुकाने पड़ते हैं

लोन संरचना

डिस्बर्सल के साथ बढ़ती है

स्थिर मासिक राशि

प्री-ईएमआई और फुल-ईएमआई चुनने के लिए स्मार्ट टिप्स

  1. बजट की योजना बनाएँ : प्री-ईएमआई शुरू से ही बढ़ सकती है। अधिकतम संभावित प्री-ईएमआई के लिए तैयार रहें।

  2. निर्माण प्रगति पर नज़र रखें : बिल्डर की प्रगति और डिस्बर्सल शेड्यूल की जाँच करें। देरी होने पर प्री-ईएमआई की अवधि बढ़ सकती है।

  3. प्री-ईएमआई या फुल-ईएमआई चुनें : कुछ बैंक फुल-ईएमआई का विकल्प देते हैं, जिसमें अतिरिक्त राशि मूलधन के भुगतान में समायोजित होती है।

  4. इमरजेंसी फंड : 6-12 महीने की ईएमआई के बराबर राशि बचाकर रखें ताकि निर्माण में देरी होने पर वित्तीय दबाव न पड़े।

  5. पेनल्टी क्लॉज़ पढ़ें : प्रोजेक्ट में देरी या रुकावट होने पर प्री-ईएमआई और लोन की शर्तों पर असर पड़ सकता है।

  6. ऑनलाइन होम लोन प्रक्रिया : कई बैंक अब वीडियो KYC और ऑनलाइन होम लोन अप्रूवल की सुविधा देते हैं, जो प्रक्रिया को तेज़ और आसान बनाती है।

प्री-ईएमआई की चुनौतियाँ

  • निर्माण में देरी : यदि प्रोजेक्ट में देरी होती है, तो प्री-ईएमआई की अवधि बढ़ सकती है, जिससे कुल ब्याज लागत बढ़ती है।

  • मूलधन पर प्रभाव नहीं : प्री-ईएमआई का भुगतान लोन के मूलधन को कम नहीं करता।

  • वित्तीय अनिश्चितता : प्रोजेक्ट की अनिश्चितता के कारण खरीदार को लंबे समय तक अनियमित भुगतान करना पड़ सकता है।

फुल-ईएमआई के लाभ

  • मूलधन में कमी : फुल-ईएमआई के साथ मूलधन और ब्याज दोनों कम होते हैं।

  • वित्तीय स्थिरता : निश्चित मासिक भुगतान से लंबी अवधि की वित्तीय योजना बनाना आसान होता है।

  • कम ब्याज लागत : समय के साथ ब्याज का बोझ कम होता है।

निष्कर्ष

अंडर-कंस्ट्रक्शन प्रॉपर्टी (Under-construction property) में निवेश करने से पहले प्री-ईएमआई (Pre EMI) और फुल-ईएमआई (Full EMI) के बीच अंतर को समझना ज़रूरी है। प्री-ईएमआई शुरुआती वित्तीय बोझ को कम करता है, लेकिन यह मूलधन को प्रभावित नहीं करता।

दूसरी ओर, फुल-ईएमआई लंबी अवधि में अधिक फायदेमंद हो सकती है। सही विकल्प चुनने के लिए निर्माण की प्रगति, लोन की शर्तें, और अपनी वित्तीय स्थिति पर विचार करें। सही योजना और जानकारी के साथ आप अपने सपनों का घर आसानी से हासिल कर सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. प्री-ईएमआई और फुल-ईएमआई में क्या अंतर है?

प्री-ईएमआई में केवल डिस्बर्स की गई राशि पर ब्याज चुकाना होता है, जबकि फुल-ईएमआई में ब्याज और मूलधन दोनों शामिल होते हैं।

2. प्री-ईएमआई की अवधि कितनी होती है?

यह निर्माण की अवधि पर निर्भर करता है, आमतौर पर 2 से 4 साल। देरी होने पर यह अवधि बढ़ सकती है।

3. क्या प्री-ईएमआई चुकाना बे​कार है?

नहीं, प्री-ईएमआई में चुकाया गया ब्याज फुल-ईएमआई शुरू होने पर मूलधन में समायोजित हो जाता है।

4. यदि निर्माण में देरी हो जाए तो क्या होगा?

निर्माण पूरा होने तक प्री-ईएमआई का भुगतान करना होगा, जिससे कुल लागत बढ़ सकती है।

5. क्या प्री-ईएमआई अवधि में प्रीपेमेंट संभव है?

हाँ, अधिकांश बैंक प्रीपेमेंट की सुविधा देते हैं, जिससे मूलधन कम हो सकता है।

6. होम लोन डिस्बर्सल कैसे ट्रैक करें?

ज़्यादातर बैंक डिजिटल ऐप या ऑनलाइन पोर्टल प्रदान करते हैं, जिनके ज़रिए डिस्बर्सल और ब्याज दरों की जानकारी मिलती है।

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