रियल मनी गेम्स पर सख्ती
सरकार के अनुसार, रियल मनी गेम्स, जैसे ऑनलाइन फैंटेसी स्पोर्ट्स, पोकर, रम्मी और लॉटरी, समाज के लिए हानिकारक हैं। आंकड़े चौंकाने वाले हैं लगभग 45 करोड़ ( 45 crores ) भारतीय हर साल इन खेलों में 20,000 करोड़ ( 20,000 crores ) रुपये गंवा देते हैं।
यह राशि इतनी है कि इससे 2,000 अस्पताल, 200 विश्वविद्यालय, या 40,000 गांवों का विद्युतीकरण हो सकता है। इन खेलों से न केवल आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर पड़ता है।
कई दुखद घटनाएं इसकी गंभीरता को दर्शाती हैं। कर्नाटक में तीन साल में गेमिंग कर्ज से जुड़ी 18 आत्महत्याएं हुईं। मध्य प्रदेश में एक 17 वर्षीय लड़के ने 35,000 रुपये हारने के बाद अपनी जान दे दी। मुंबई में एक युवती 2 लाख रुपये जीतने के बाद 9 लाख के कर्ज में डूब गई और आत्महत्या का प्रयास किया। ऐसे मामलों ने सरकार को सख्त कदम उठाने के लिए मजबूर किया।
नए कानून के तहत, रियल मनी गेम्स को संचालित करने, प्रचार करने या विज्ञापन देने पर सख्त सजा का प्रावधान है। उल्लंघन करने वालों को तीन साल तक की जेल और 1 करोड़ रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। बार-बार उल्लंघन पर सजा को और कड़ा किया गया है, जिसमें 3 से 5 साल की जेल और 2 करोड़ तक का जुर्माना शामिल है।
ई-स्पोर्ट्स और सोशल गेमिंग को बढ़ावा
नया कानून केवल प्रतिबंधों तक सीमित नहीं है। यह ई-स्पोर्ट्स और ऑनलाइन सोशल गेमिंग को बढ़ावा देने पर भी जोर देता है। ई-स्पोर्ट्स को एक वैध उद्योग के रूप में मान्यता दी गई है, जो वर्तमान में 1.5 लाख लोगों को रोजगार देता है। 2030 तक यह आंकड़ा दोगुना होने की उम्मीद है।
भारत में 48.8 करोड़ लोग ऑनलाइन गेमिंग से जुड़े हैं, और 2025 तक यह संख्या 51.7 करोड़ तक पहुंच सकती है। वैश्विक स्तर पर ई-स्पोर्ट्स दर्शकों की संख्या 64 करोड़ को पार कर जाएगी, जिसमें भारत का बड़ा योगदान होगा।
सरकार ने एक केंद्रीय नियामक प्राधिकरण स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है, जो गेमिंग उद्योग की निगरानी करेगा, नवाचार को प्रोत्साहित करेगा और नीतियां बनाएगा। इस प्राधिकरण का शुरुआती खर्च 50 करोड़ रुपये और वार्षिक लागत 20 करोड़ रुपये होगी।
उद्योग पर प्रभाव
इस कानून से ड्रीम11, मोबाइल प्रीमियर लीग (MPL), और ज़ूपी जैसी कंपनियों ने अपने रियल मनी गेम्स बंद कर दिए हैं। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि इससे 400 कंपनियां बंद हो सकती हैं और 2 लाख नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं।
2024 में गेमिंग स्टार्टअप्स ने 3,000 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित किया था, जो 2025 में 5,000 करोड़ तक पहुंच सकता था। लेकिन इस प्रतिबंध से उद्योग को बड़ा झटका लग सकता है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि सख्त नियमों के बजाय लाइसेंसिंग और नियमन बेहतर विकल्प हो सकता था।
सरकार का दृष्टिकोण
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस कानून को भारत को गेमिंग, नवाचार और रचनात्मकता का केंद्र बनाने की दिशा में एक कदम बताया। उन्होंने कहा, “यह बिल समाज को रियल मनी गेम्स के हानिकारक प्रभावों से बचाएगा और ई-स्पोर्ट्स को प्रोत्साहित करेगा। ”
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे “सार्वजनिक स्वास्थ्य जोखिम” करार देते हुए कहा कि यह कानून मध्यम वर्ग और युवाओं की सुरक्षा को प्राथमिकता देता है।
निष्कर्ष
ऑनलाइन गेमिंग कानून 2025 भारत के डिजिटल परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण बदलाव लाने के लिए तैयार है। यह न केवल हानिकारक गेमिंग प्रथाओं को रोकने का प्रयास करता है, बल्कि ई-स्पोर्ट्स को एक वैश्विक मंच पर ले जाने का लक्ष्य भी रखता है।
हालांकि, उद्योग के लिए इसके अल्पकालिक प्रभावों पर बहस जारी है। यह कानून समाज की सुरक्षा और नवाचार के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है, लेकिन इसका दीर्घकालिक असर समय ही बताएगा।