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मक्का पीलापन रोग: हिमाचल में किसानों की बढ़ी चिंता, सरकार का मुआवजा और वैज्ञानिक जांच का वादा

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मक्का पीलापन रोग: क्या है यह समस्या?

मक्का पीलापन रोग (Maize yellowing disease) एक गंभीर स्थिति है, जिसमें पौधों की पत्तियां हरी रहने के बजाय पीली या हल्के हरे रंग की हो जाती हैं। धीरे-धीरे पत्तियां सड़ने लगती हैं, जिससे पौधे का विकास रुक जाता है। मक्के के भुट्टे के दाने भी हल्के और कमजोर हो जाते हैं, जिससे उपज की मात्रा और गुणवत्ता दोनों प्रभावित होती हैं। इससे किसानों को बाजार में सही दाम नहीं मिलता, और आर्थिक नुकसान होता है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यह बीमारी नाइट्रोजन (Nitrogen) और जिंक (Zinc) जैसे पोषक तत्वों की कमी, जड़ों का मिट्टी में कमजोर पकड़, कीटों का प्रकोप, अधिक पानी, या गलत खाद के उपयोग से फैलती है। पिछले दो-तीन सालों से यह समस्या हिमाचल (Himachal) में तेजी से बढ़ रही है, जिसने किसानों की चिंता को और गहरा कर दिया है।

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हिमाचल में मक्का उत्पादन और इस बार का संकट

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 18 अगस्त 2025 तक देश में मक्का बुवाई का रकबा 93 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया है, जो पिछले साल की तुलना में 10 लाख हेक्टेयर अधिक है। इस बार अच्छे मॉनसून और मिट्टी में नमी के कारण मक्का उत्पादन में वृद्धि की उम्मीद थी। मक्का का उपयोग इथेनॉल, पशु चारा, और पौष्टिक खाद्य उत्पादों में होने से किसानों को अच्छा भाव मिल रहा है। लेकिन, पीलापन रोग ने इस उम्मीद पर पानी फेर दिया है। हिमाचल में यह बीमारी खासतौर पर शाहपुर जैसे क्षेत्रों में ज्यादा देखी जा रही है।


विधानसभा में उठा किसानों का मुद्दा

हिमाचल प्रदेश की विधानसभा में मक्का पीलापन रोग का मुद्दा जोर-शोर से उठा। शाहपुर से कांग्रेस विधायक केवल सिंह पठानिया ने शून्यकाल में इस समस्या को सामने रखा। उन्होंने बताया कि उनके क्षेत्र सहित पूरे प्रदेश में मक्का और धान की फसल इस बीमारी की चपेट में है। उन्होंने सरकार से आपदा राहत पैकेज की तर्ज पर किसानों को मुआवजा देने की मांग की। पठानिया ने कहा कि यह बीमारी लाखों किसानों की आजीविका को प्रभावित कर रही है, और तत्काल कदम उठाने की जरूरत है।


सरकार और वैज्ञानिकों की कार्रवाई

हिमाचल के कृषि मंत्री चंद्र कुमार (Chandra Kumar) ने इस मामले पर त्वरित प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने मीडिया को बताया कि कृषि विभाग ने विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों की टीमें खेतों में भेजी हैं। ये टीमें बीमारी की जांच करेंगी और इसके कारणों का पता लगाएंगी। मंत्री ने आश्वासन दिया कि अगर फसल का नुकसान 30% से अधिक हुआ तो आपदा राहत पैकेज के संशोधित नियमों के तहत मुआवजा दिया जाएगा। यह कदम किसानों के लिए राहत की उम्मीद लेकर आया है, लेकिन समय पर जांच और समाधान जरूरी है।


पीलापन रोग से बचाव के उपाय

कृषि विशेषज्ञों ने मक्का पीलापन रोग से बचाव के लिए कुछ सुझाव दिए हैं:

  • पोषक तत्वों की पूर्ति : मिट्टी में नाइट्रोजन और जिंक की कमी को पूरा करने के लिए उपयुक्त उर्वरकों का उपयोग करें।

  • कीट नियंत्रण : कीटों से बचाव के लिए जैविक या अनुशंसित रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग करें।

  • सही सिंचाई : अधिक पानी से बचें और ड्रेनेज सिस्टम को बेहतर करें।

  • खेत प्रबंधन : मिट्टी की उर्वरता और जड़ों की मजबूती के लिए नियमित जांच करें।

किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे स्थानीय कृषि विभाग से संपर्क करें और वैज्ञानिकों की सलाह मानें ताकि फसल को और नुकसान से बचाया जा सके।

आगे की राह

मक्का पीलापन रोग ने हिमाचल के किसानों के सामने गंभीर चुनौती पेश की है। सरकार और वैज्ञानिकों की सक्रियता से उम्मीद है कि इस समस्या का जल्द समाधान होगा। मुआवजा और वैज्ञानिक जांच इस दिशा में सकारात्मक कदम हैं, लेकिन दीर्घकालिक उपायों की जरूरत है ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति से बचा जा सके। किसानों को भी जागरूक रहकर समय पर कदम उठाने होंगे।

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