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Gladiolus Farming: सितंबर-अक्टूबर में शुरू करें, 90 दिनों में लाखों कमाएं

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ग्लैडियोलस की खेती क्यों है खास?

ग्लैडियोलस (Gladiolus) एक लोकप्रिय फूल है, जो अपनी सुंदरता और बाजार में उच्च मांग के कारण किसानों के लिए फायदेमंद है। भारत में फूलों की खेती में यह तीसरे स्थान पर है। यह मुख्य रूप से सर्दियों (Winter) का फूल है, लेकिन मध्यम जलवायु वाले क्षेत्रों में इसे साल भर उगाया जा सकता है।

सितंबर-अक्टूबर (September-October) से नवंबर-दिसंबर (November-December) तक इसकी बुआई का सबसे अच्छा समय होता है। इसकी खेती कम समय में उच्च मुनाफा देती है, जिससे यह छोटे और बड़े किसानों के लिए आकर्षक विकल्प है।

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लोकप्रिय किस्में और उनकी मांग

ग्लैडियोलस की हजारों किस्में उपलब्ध हैं, लेकिन बाजार की मांग के अनुसार रंगों का चयन करना जरूरी है। निम्नलिखित किस्में मैदानी इलाकों में सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं:

  • स्नो क्वीन (Snow Queen) : सफेद रंग, शादी के लिए पसंदीदा।

  • सिल्विया और एपिस ब्लासम (Sylvia and Epis Blossom) : गुलाबी और लाल रंग, सजावट के लिए उपयुक्त।

  • रेखा, पूसा सुहागिन, नजराना आरती (Rekha, Pusa Suhagin, Nazrana Aarti) : पीले और मिश्रित रंग, उच्च मांग।

  • अप्सरा, शोभा, सपना, पूनम (Apsara, Shobha, Sapna, Poonam) : टिकाऊ और आकर्षक फूल।

इन किस्मों को चुनकर किसान बाजार की जरूरतों को आसानी से पूरा कर सकते हैं।


खेत की तैयारी और उर्वरक का उपयोग

ग्लैडियोलस की खेती के लिए खेत की अच्छी तैयारी जरूरी है। प्रति एकड़ खेती के लिए निम्नलिखित उर्वरकों की आवश्यकता होती है:

  • कंपोस्ट खाद (Compost Manure) : 5-6 टन, खेत की मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिए।

  • नाइट्रोजन (Nitrogen) : 80 किलो, फसल की वृद्धि के लिए।

  • फास्फोरस (phosphorus) : 160 किलो, जड़ों को मजबूत करने के लिए।

  • पोटाश (potash) : 80 किलो, फूलों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए।


उर्वरक देने का तरीका

  • बुआई से पहले खेत में कंपोस्ट (Compost), फास्फोरस (phosphorus) और पोटाश (potash) की पूरी मात्रा मिलाएं।

  • नाइट्रोजन (Nitrogen) का केवल एक-तिहाई हिस्सा बेसल डोज (Basal Dose) के रूप में डालें।

  • बाकी नाइट्रोजन को दो बराबर हिस्सों में टॉप ड्रेसिंग (Top dressing) के रूप में दें।


कंदों की रोपाई का सही तरीका

ग्लैडियोलस की खेती इसके कंदों (बल्ब) से की जाती है, जो आलू जैसे दिखते हैं। प्रति एकड़ लगभग 60,000 कंदों की जरूरत होती है। रोपाई से पहले कंदों को 0.2% कार्बेंडाजिम (Carbendazim) के घोल में डुबोकर फफूंदनाशक उपचार करें, ताकि फसल फंगस से सुरक्षित रहे। बुआई के दो तरीके हैं:

  • क्यारी विधि (Bed method) : 25 सेंटीमीटर की दूरी पर 5 सेंटीमीटर गहराई में कंद लगाएं। सुनिश्चित करें कि खेत में पानी जमा न हो।

  • मेड़ विधि (Ridge method) : खेत में मेड़ बनाकर नालियों में कंद रोपें। यह तरीका अधिक सुरक्षित है।

रोपाई के समय कंद का जड़ वाला हिस्सा नीचे और कल्ले वाला हिस्सा ऊपर होना चाहिए। पहले कंदों को अंकुरित करने से बेहतर परिणाम मिलते हैं।

ग्लैडियोलस से कितना मुनाफा?

ग्लैडियोलस की खेती (Cultivation of Gladiolus) किसानों के लिए मुनाफे का शानदार अवसर है। पहले साल में प्रति एकड़ खेती की लागत लगभग 2 लाख रुपये आती है, क्योंकि कंद खरीदने में अधिक खर्च होता है। फसल 90 दिनों में तैयार हो जाती है और इससे करीब 3 लाख रुपये की कमाई होती है, जिससे 1 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा मिलता है। दूसरे साल से लागत घटकर 20,000 रुपये प्रति एकड़ रह जाती है, क्योंकि कंद पहली फसल से मिल जाते हैं। कमाई 3 लाख रुपये पर स्थिर रहती है, जिससे मुनाफा बढ़कर 2.80 लाख रुपये तक हो जाता है।

निष्कर्ष

ग्लैडियोलस (Gladiolus) की खेती न केवल आसान है, बल्कि कम समय में अधिक मुनाफा देने वाली भी है। सितंबर-अक्टूबर में बुआई शुरू करें, सही किस्में चुनें, और उचित उर्वरक व रोपाई तकनीकों का उपयोग करें। यह खेती छोटे और बड़े दोनों तरह के किसानों के लिए लाभकारी है। अगर आप इस खेती को शुरू करने की सोच रहे हैं, तो अभी से तैयारी शुरू करें और बाजार की मांग का फायदा उठाएं।

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