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भैंस खरीदने से पहले उम्र, नस्ल और स्वास्थ्य जरूर जांचें, वरना होगा बड़ा नुकसान

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डेयरी फार्मिंग: एक उभरता हुआ बिजनेस अवसर

पिछले कुछ वर्षों में भारत में डेयरी फार्मिंग ने तेजी से लोकप्रियता हासिल की है। बढ़ती जनसंख्या और दूध व दुग्ध उत्पादों की मांग के कारण यह व्यवसाय ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में आकर्षक बन गया है। यदि आप नौकरी से ऊब चुके हैं, रिटायरमेंट के बाद गांव में बसने की योजना बना रहे हैं, या फिर घर से कोई बिजनेस शुरू करना चाहते हैं, तो डेयरी फार्मिंग आपके लिए एक शानदार विकल्प हो सकता है। विशेष रूप से भैंस पालन इस व्यवसाय का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, क्योंकि भैंस का दूध उच्च वसा युक्त होता है और बाजार में इसकी मांग अधिक है।

हालांकि, भैंस खरीदने से पहले कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना जरूरी है, खासकर अगर आप पहली बार पशुपालन में कदम रख रहे हैं। गलत भैंस चुनने से न केवल आपका पैसा बर्बाद हो सकता है, बल्कि आपके डेयरी बिजनेस की शुरुआत भी असफल हो सकती है। इस लेख में हम उन सभी जरूरी पहलुओं पर चर्चा करेंगे, जिन्हें भैंस खरीदते समय ध्यान में रखना चाहिए।

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भैंस की नस्ल और उम्र का चयन

सही नस्ल का महत्व

भैंस की नस्ल डेयरी फार्मिंग की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। भारत में कुछ नस्लें अपनी उच्च दूध उत्पादन क्षमता के लिए प्रसिद्ध हैं। इनमें शामिल हैं:

  • मुर्रा : यह नस्ल सबसे लोकप्रिय है और इसे "डेयरी की रानी" कहा जाता है। मुर्रा भैंस प्रतिदिन 15-20 लीटर दूध दे सकती है।

  • सूरती : यह नस्ल छोटे कद की होती है और गर्म जलवायु में अच्छा प्रदर्शन करती है।

  • जाफराबादी : यह भारी शरीर वाली नस्ल है और इसका दूध उच्च वसा युक्त होता है।

नस्ल चुनते समय स्थानीय जलवायु और अपने क्षेत्र की मांग को भी ध्यान में रखें। उदाहरण के लिए, मुर्रा भैंस उत्तर भारत में अधिक लोकप्रिय है, जबकि सूरती दक्षिण और पश्चिम भारत के लिए उपयुक्त है। नस्ल की जानकारी के लिए स्थानीय पशु चिकित्सक या पशुपालन विशेषज्ञ से संपर्क करें।

उम्र का चयन

भैंस की उम्र भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों के अनुसार, दूसरी या तीसरी ब्यांत वाली भैंस खरीदना सबसे अच्छा होता है। ऐसी भैंसें न केवल अच्छा दूध देती हैं, बल्कि उनकी शारीरिक स्थिति भी स्थिर होती है। चौथी ब्यांत से अधिक वाली भैंसों से बचें, क्योंकि उनकी दूध देने की क्षमता कम हो सकती है और स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ सकती हैं।


भैंस के स्वास्थ्य की जांच

स्वस्थ भैंस चुनना डेयरी फार्मिंग की आधारशिला है। अस्वस्थ भैंस न केवल कम दूध देगी, बल्कि आपके अन्य पशुओं को भी बीमार कर सकती है। स्वास्थ्य जांच के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखें:

  • जुगाली का अवलोकन : भैंस को चारा खिलाएं और देखें कि क्या वह जुगाली कर रही है। जुगाली करना स्वस्थ पाचन तंत्र का संकेत है।

  • शारीरिक स्थिति : भैंस की त्वचा, आंखें और नाक की जांच करें। त्वचा चमकदार और बिना घावों वाली होनी चाहिए। आंखें साफ और नाक से कोई स्राव नहीं होना चाहिए।

  • चलने-फिरने का तरीका : भैंस को कुछ देर चलाएं और देखें कि क्या वह लंगड़ा रही है या असामान्य व्यवहार कर रही है।

इसके अलावा, भैंस का टीकाकरण रिकॉर्ड मांगें। खुरपका-मुंहपका (FMD), ब्रुसेलोसिस और अन्य बीमारियों के लिए टीकाकरण जरूरी है। यदि विक्रेता टीकाकरण का प्रमाण नहीं दे पाता, तो खरीदने से पहले पशु चिकित्सक से जांच कराएं।


भैंस के स्वभाव का आकलन

भैंस का स्वभाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना उसका स्वास्थ्य। कुछ भैंसें दूध निकालते समय आक्रामक हो सकती हैं, जैसे लात मारना या हर किसी को दूध निकालने न देना। ऐसी भैंसें आपके लिए परेशानी का सबब बन सकती हैं।

स्वभाव की जांच के लिए:

  • खुद दूध निकालकर देखें। यदि भैंस शांत रहती है और आसानी से दूध देती है, तो यह एक अच्छा संकेत है।

  • भैंस को चारा खिलाते समय उसका व्यवहार देखें। यदि वह शांत और सामान्य व्यवहार करती है, तो वह आपके फार्म के लिए उपयुक्त हो सकती है।


अन्य जरूरी बातें

चोट और घाव की जांच

खरीदने से पहले भैंस के शरीर पर किसी भी प्रकार की चोट, घाव या त्वचा रोग की जांच करें। छोटी-सी चोट भी बाद में गंभीर संक्रमण का कारण बन सकती है। विशेष रूप से, थन (udder) की जांच करें, क्योंकि थन में सूजन या घाव दूध उत्पादन को प्रभावित कर सकते हैं।

नियमित देखभाल और रखरखाव

भैंस खरीदने के बाद उसकी देखभाल उतनी ही महत्वपूर्ण है। नियमित साफ-सफाई, उचित चारा, और समय पर टीकाकरण आपके पशु को स्वस्थ रखेगा। इसके लिए:

  • भैंस के रहने की जगह को साफ और सूखा रखें।

  • संतुलित आहार दें, जिसमें हरा चारा, सूखा चारा और खनिज मिश्रण शामिल हो।

  • स्थानीय पशु चिकित्सक से नियमित जांच कराएं।

आर्थिक पहलू

डेयरी फार्मिंग शुरू करने से पहले अपने बजट का आकलन करें। एक अच्छी नस्ल की भैंस की कीमत 50,000 से 1,50,000 रुपये तक हो सकती है, जो नस्ल, उम्र और स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। इसके अलावा, चारा, शेड निर्माण और चिकित्सा खर्चों को भी ध्यान में रखें।

डेयरी फार्मिंग में भारत की स्थिति

कृषि मंत्रालय के अनुसार, भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है, और 2023-24 में भारत ने लगभग 230 मिलियन टन दूध का उत्पादन किया। इसमें भैंस के दूध का योगदान लगभग 49% है। उत्तर प्रदेश, राजस्थान और गुजरात जैसे राज्य भैंस पालन और डेयरी फार्मिंग के प्रमुख केंद्र हैं। सरकारी योजनाएं जैसे राष्ट्रीय गोकुल मिशन और डेयरी उद्यमिता विकास योजना भी पशुपालकों को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान करती हैं।

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